शराब की दुकान संचालकों पर दर्ज एफआईआर की मांगी जानकारी, लाइसेंस रद्द करने के मामलों की भी जानकारी दे आबकारी अधिकारी-हाईकोर्ट

जयपुर, 08 अप्रैल । राजस्थान हाईकोर्ट ने जिला आबकारी अधिकारी को साल 2025-26 में आबकारी अधिनियम की अवहेलना करने पर दर्ज कराई गई एफआईआर का विवरण दो सप्ताह में अदालत में पेश करने को कहा है। अदालत ने आबकारी अधिकारी से यह भी बताने को कहा है कि दर्ज कराई गई एफआईआर में से कितने मामलों में आबकारी लाइसेंस रद्द किए गए। इसके साथ ही अदालत ने जिला आबकारी अधिकारी, जयपुर ग्रामीण की ओर से गत 18 फरवरी को याचिकाकर्ता के लाइसेंस का नवीनीकरण नहीं करने के आदेश पर रोक लगाते हुए उसे आगामी आदेशों तक दुकान का संचालन करने की छूट दी है। जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश गोविन्द शर्मा की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में वरिष्ठ अधिवक्ता आरबी माथुर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को धानक्या में साल 2025 से 2029 तक शराब की दुकान का लाइसेंस जारी किया गया था। जिसका हर साल नवीनीकरण होता है। याचिकाकर्ता के खिलाफ आबकारी अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज होने के आधार पर विभाग ने गत 8 अगस्त को उसका लाइसेंस रद्द कर दिया। याचिका में कहा गया कि इस आठ अगस्त के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देने पर अदालत ने 12 अगस्त को उस पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ता ने जब साल 2026-27 के नवीनीकरण के लिए आवेदन किया तो विभाग ने 8 अगस्त के आदेश का हवाला देते हुए उसका आवेदन निरस्त कर दिया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि आठ अगस्त के आदेश पर अदालत ने रोक लगा दी थी। ऐसे में उसके आवेदन को निरस्त करना गलत है। सुनवाई के दौरान जिला आबकारी अधिकारी राजेन्द्र प्रसाद गर्ग अदालत में हाजिर हुए। उन्होंने बताया कि साल 2025-26 में 60 शराब की दुकानों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए थे। इसके अलावा लाइसेंस की शर्त के अनुसार लाइसेंस धारक के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर उसका लाइसेंस रद्द किया जा सकता है। इस पर अदालत ने याचिकाकर्ता को राहत देते हुए विभाग से जानकारी पेश करने को कहा है।