जयपुर, 01 मई । राजस्थान हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त और झोटवाडा जोन उपायुक्त सहित संबंधित ठेकेदार को 6 मई को अदालत में पेश होकर बताने को कहा है सीवरेज सफाई के दौरान श्रमिकों की मौत कैसे हुई। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस शुभा मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश स्नेहांश फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता पलक सक्सैना ने अदालत को बताया कि प्रदेश में हाथ से मैला ढोने वालों के नियोजन का प्रतिषेध और उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रावधानों की अवहेलना की जा रही है। जयपुर और जोधपुर जैसे बड़े शहरों में सरकार इस अधिनियम के प्रावधान लागू करने में विफल रही है। जिसके चलते हाथ से मैला ढोने और सीवर की सफाई के दौरान दुखद घटनाएं हुई हैं। याचिका में कहा गया कि गत 17 अप्रैल को सीवर की सफाई के लिए दो मजदूर को चैंबर में उतारा गया। जिससे दम घुटने से उनकी मौत हो गई, जबकि मैनहोल की सफाई मशीनों से करने का प्रावधान है। सीवर सफाई का कार्य नगर निगम के अधिकारियों के निर्देश और मार्गदर्शन में होता है। ऐसे में ऐसी घटनाओं के लिए वे जिम्मेदार है। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने निगम आयुक्त और उपायुक्त सहित संबंधित ठेकेदार को हाजिर होकर इस संबंध में अपना स्पष्टीकरण देने को कहा है।
गौरतलब है कि झोटवाड़ा नगर निगम एरिया के तहत करधनी इलाके में 17 अप्रैल को सफाईकर्मी अजय और रामबाबू बिना सुरक्षा उपकरण सीवर लाइन साफ करने उतरे थे। इस दौरान जहरीली गैस के संपर्क में आने से उनकी मौत हो गई। घटना को लेकर 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की गई है।