भारतीय महिला हॉकी टीम के विशेष गोलकीपिंग शिविर में खिलाड़ियों ने बताए अपने अनुभव

बेंगलुरु, 04 मई । भारतीय महिला हॉकी टीम के गोलकीपर्स के लिए बेंगलुरु के भारतीय खेल प्राधिकरण केंद्र में लगाया गया विशेष प्रशिक्षण शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह 11 दिवसीय शिविर 22 अप्रैल से 2 मई तक चला, जिसमें खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय प्रशिक्षण दिया गया।

इस शिविर का संचालन कोच डेविड विलियमसन ने किया, जबकि मुख्य कोच सजोर्ड मरीजने के मार्गदर्शन में पूरे सत्र को अंजाम दिया गया। शिविर को आनंदना (कोका-कोला इंडिया फाउंडेशन) का सहयोग भी प्राप्त हुआ।

सीनियर गोलकीपर्स ने लिया हिस्सा

इस प्रशिक्षण शिविर में टीम की अनुभवी गोलकीपर सविता, बिछू देवी खरीबाम, बंसारी सोलंकी और माधुरी किंडो ने भाग लिया। शिविर के दौरान खिलाड़ियों ने तकनीकी कौशल, निर्णय क्षमता, रक्षात्मक समन्वय और मैच परिस्थितियों में रणनीतिक समझ पर विशेष ध्यान दिया।

सविता ने बताया अहम अनुभव

सीनियर गोलकीपर सविता ने हॉकी इंडिया के हवाले से कहा कि ऐसे शिविर हमें अपनी गलतियों को सुधारने और कौशल को निखारने का मौका देते हैं। यहां हम मैच जैसी परिस्थितियों में अभ्यास करते हैं, जिससे मैदान पर आत्मविश्वास बढ़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक वरिष्ठ खिलाड़ी के रूप में उनकी जिम्मेदारी युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन करना भी है। उन्होंने कहा, “मैं कोशिश करती हूं कि युवा गोलकीपर्स को अपने अनुभव से छोटी-छोटी बातें सिखा सकूं और उन्हें प्रेरित रखूं,”

बिछू देवी ने फिटनेस और डिफेंस पर दिया जोर

भारत के लिए 60 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी बिछू देवी खरीबाम ने कहा कि यह शिविर आगामी बड़े टूर्नामेंट्स की तैयारी के लिहाज से बेहद अहम रहा। उन्होंने बताया, “हमने फिटनेस के साथ-साथ रक्षात्मक ढांचे को मजबूत करने पर काम किया। साथ ही, मैदान पर संवाद और तालमेल बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।”

बंसारी सोलंकी ने सीखी नई रणनीतियां

बंसारी सोलंकी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि इस शिविर से उन्हें दबाव में निर्णय लेने, डिफेंस को व्यवस्थित रखने और मैदान पर शांत रहने की कला सीखने को मिली। उन्होंने बताया कि कोचिंग स्टाफ ने खिलाड़ियों की बुनियादी तकनीक को मजबूत करने के साथ-साथ छोटी-छोटी सुधारों पर भी काम किया, जो खेल में बड़ा फर्क ला सकते हैं।

रणनीतिक पहलुओं पर विशेष फोकस

शिविर में खिलाड़ियों ने पेनल्टी कॉर्नर डिफेंस, सेट पीस और विभिन्न मैच परिस्थितियों को समझने पर भी काम किया। कोचिंग टीम ने खिलाड़ियों को अलग-अलग हालात में सही निर्णय लेने और डिफेंस को बेहतर तरीके से संगठित करने का प्रशिक्षण दिया।