रांची, 11 मई । रामगढ़ जिले के प्रसिद्ध मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण से जुड़े मामले में दायर अवमानना याचिका पर सोमवार को झारखंड उच्च न्यायालय में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान रामगढ़ के उपायुक्त (डीसी) वर्चुअल माध्यम से अदालत में उपस्थित हुए और मंदिर परिसर से हटाए गए वेंडरों के पुनर्वास समेत श्रद्धालुओं की सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी तैयारियों की जानकारी दी।
उपायुक्त ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर से हटाए गए 254 वेंडरों को पहले मंदिर के निकट अस्थायी रूप से पुनर्वासित किया जाएगा। इसके बाद उनके लिए दुकानें बनाकर स्थायी पुनर्वास की व्यवस्था की जाएगी, ताकि किसी भी दुकानदार को आजीविका संबंधी परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने यह भी बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर में दरी बिछाने और पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही वन भूमि पर अवैध कब्जा कर दुकान चला रहे लोगों को हटाया जाएगा। अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि का उपयोग मंदिर के पुनर्निर्माण और सौंदर्यीकरण कार्यों में किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान उपायुक्त ने रजरप्पा मंदिर के पुनर्निर्माण से संबंधित मास्टर प्लान अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया। इस पर न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को निर्धारित करते हुए उस दिन भी उपायुक्त को उपस्थित रहने का निर्देश दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने भैरवी नदी के डेंजर जोन में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता जताई। न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए दो स्तरों पर बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जानी चाहिए। अदालत ने निर्देश दिया कि तत्काल लो-लेवल बैरिकेडिंग की जाए, जबकि बरसात के मौसम को ध्यान में रखते हुए हाई-लेवल बैरिकेडिंग की अलग व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता भारत कुमार ने अदालत में पक्ष रखा।
उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में जल संसाधन विभाग के सचिव ने अदालत को बताया था कि भैरवी नदी के डेंजर जोन में सुरक्षा व्यवस्था के लिए लगभग 50 लाख रुपये की लागत से बैरिकेडिंग का डीपीआर तैयार किया गया है।
दरअसल, उच्च न्यायालय ने पूर्व में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान मां छिन्नमस्तिका मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे। अदालत ने कहा था कि मंदिर के समीप स्थित भैरवी नदी तट पर पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण कई लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसे में न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुरक्षित वातावरण और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
प्रार्थी ने अवमानना याचिका दायर कर 11 अगस्त 2023 को पारित आदेश के अनुपालन की मांग की है। उस आदेश में उच्च न्यायालय ने झारखंड सरकार, पर्यटन विभाग, झारखंड पर्यटन विकास निगम और रामगढ़ जिला प्रशासन को कई अनिवार्य निर्देश दिए थे।
इन निर्देशों में मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, स्थायी स्नान घाटों का निर्माण, वस्त्र बदलने के कक्ष, शौचालय, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराना, अतिक्रमण हटाना तथा नदी के चौड़ीकरण जैसे कार्य शामिल हैं।
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