निम्बाहेड़ा में 1 जुलाई से शुरू होगा 21वां कल्याण महाकुंभ

चित्तौड़गढ़, 19 जून । श्री शेषावतार कल्लाजी वेदपीठ एवं शोध संस्थान तथा श्री कल्लाजी मंदिर मंडल न्यास के तत्वावधान में कल्याण नगरी निम्बाहेड़ा में आगामी 1 से 8 जुलाई तक 21वें कल्याण महाकुंभ का भव्य आयोजन किया जाएगा। महोत्सव की तैयारियां व्यापक स्तर पर जारी हैं। आयोजन के जनजागरण के लिए 21 जून को निम्बाहेड़ा से चित्तौड़गढ़ तक आध्यात्मिक कल्याण महापदयात्रा निकाली जाएगी।

वेदपीठ के पदाधिकारियों ने ऋतुराज वाटिका में आयोजित पत्रकार वार्ता में बताया कि ज्येष्ठ शुक्ला सप्तमी के अवसर पर 21 जून को कमधजनगर स्थित श्री कल्लाजी मंदिर से महापदयात्रा प्रारंभ होगी, जो दुर्ग मार्ग स्थित द्वितीय पोल के समीप कल्लाजी स्मारक तक पहुंचेगी। इस पदयात्रा में निम्बाहेड़ा सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों और मार्ग के हजारों श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

उन्होंने बताया कि 21वें कल्याण महाकुंभ के दौरान इस वर्ष 15वें महापुराण के रूप में श्री लिंग महापुराण कथा का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से मंदिर परिसर में आचार्यों एवं बटुकों द्वारा विधि-विधान से पारायण किया जा रहा है। अब तक 109 यजमान इसमें सहभागिता निभा चुके हैं। पारायण 30 जून तक जारी रहेगा। इस दौरान 1331 नमक-चमक से भगवान आशुतोष का विशेष अभिषेक भी किया जा रहा है। सवा करोड़ जाप के लक्ष्य के तहत अब तक तीन करोड़ पंचाक्षरी मंत्रों का जाप आचार्यों, बटुकों एवं श्रद्धालुओं द्वारा किया जा चुका है।

अष्टदिवसीय कल्याण महाकुंभ का शुभारंभ 1 जुलाई को आषाढ़ कृष्ण प्रतिपदा के अवसर पर दशहरा मैदान से विशाल कलशोत्सव एवं शोभायात्रा के साथ होगा। शोभायात्रा में मुंबई का विशेष बैंड, 21 मालवीय ढोल, देशभक्ति एवं शिवमय झांकियां, 11 बैंड, 51 अश्व और ऊंट आकर्षण का केंद्र रहेंगे।

आयोजकों के अनुसार मेवाड़, मालवा, गुजरात और मारवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु महोत्सव में भाग लेंगे। करीब 200 गांवों की प्रभात फेरियां भी आयोजन से जुड़ेंगी। लगभग पांच किलोमीटर लंबी शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई मंदिर परिसर पहुंचेगी। नगरवासी ठाकुर श्री के रथ की अगवानी के लिए विशेष तैयारियों में जुटे हैं। विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत, पूजा-अर्चना और जलपान की व्यवस्थाएं की जा रही हैं। आयोजकों का कहना है कि इस वर्ष का महाकुंभ धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व का होगा।