कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता एवं सुशासन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि एवं कृषक कल्याण तथा उर्वरक विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। एग्रीस्टेक योजना के अंतर्गत जारी फार्मर रजिस्ट्री का उपयोग करते हुए राष्ट्रीय उर्वरक तंत्र के तहत फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल्स लागू किया जा रहा है।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने बताया कि भारत सरकार द्वारा उर्वरकों पर भारी सब्सिडी प्रदान की जाती है। अनुदानित उर्वरकों का गैर कृषि कार्यों में उपयोग, कालाबाजारी, जमाखोरी आदि आपराधिक कृत्यों को रोकने के लिए इस अभिनव पहल को राजस्थान में प्रथम चरण में सिरोही एवं राजसमंद जिलों में पायलट परियोजना के रूप में 25 जून से लागू किया जा रहा है। इस प्रणाली के माध्यम से किसानों को अनुदानित उर्वरकों का वितरण अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं डिजिटल माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि फार्मर रजिस्ट्री आधारित एफएफएस प्रणाली लागू होने से वास्तविक किसानों की पहचान सुनिश्चित होगी तथा उर्वरकों के वितरण एवं उपयोग की निगरानी और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी। इससे उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और स्टॉक प्रबंधन में पारदर्शिता आएगी तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। इस प्रणाली से कृषक स्वयं घर बैठे ही या नजदीकी ई मित्र पर जा कर अनुदानित उर्वरकों की बूकिंग कर टोकन जनरेट कर सकेंगे। यह टोकन अधिकतम 48 घंटे तक वैलिड रहेगा, जिसके बाद इसे दुबारा से बुक करना होगा। टोकन जनरेट होने के बाद कृषक नजदीकी उर्वरक डीलर से अनुदानित उर्वरक ले सकेंगे।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 86.66 लाख किसानों की फार्मर आईडी बनाई जा चुकी है। फार्मर आईडी बनाने में राजस्थान देश के अग्रिणी राज्यों में शामिल है।
इस पहल के सफल क्रियान्वयन हेतु चयनित जिलों में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके तहत ब्लॉक एवं ग्रामवार कार्यरत खुदरा उर्वरक विक्रेताओं की जानकारी का एलजीडी कोड सहित आईएफएमएस पोर्टल पर अद्यतनकरण, पोर्टल पर लंबित उर्वरक प्राधिकार पत्रों को अपडेट करना, मास्टर ट्रेनर्स की पहचान, प्रचार-प्रसार सामग्री तैयार करना तथा उर्वरक विक्रेताओं को प्रशिक्षण प्रदान करने जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
इसके साथ ही चयनित जिलों में उर्वरकों के स्टॉक एवं उपलब्धता की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी तथा भारत सरकार द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित की जाएगी।
कृषि आयुक्त ने कहा कि यह पहल कृषि क्षेत्र में डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी तथा सरकारी अनुदान का लाभ वास्तविक पात्र किसानों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी।