से 11 बजे तक हड़ताल पर रहे चिकित्सकों की हड़ताल का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ा।
उमस और गर्मी के मौसम में दो घंटे चिकित्सकों की ओपीडी के बाहर बैठे रहे। फिर अपनी
बारी आने का इंतजार करते रहे।
सुबह आए मरीजों को चिकित्सकों को दिखाने के लिए
दोपहर तक इंतजार करना पड़ा। चिकित्सकों की हड़ताल के कारण काफी मरीजों को सैंपल रिपोर्ट
मिलने में देरी हुई। ऐसे में मरीजों को वीरवार को दोबारा से अस्पताल में आना पड़ेगा।
वहीं एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती वे काले
बिल्ले लगाकर अपना काम करेंगे।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज एसोसिएशन के प्रधान
डा. मुनीष पूनिया के नेतृत्व में चिकित्सक सुबह सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर एकत्रित
हुए और रोष जाहिर किया। उनका कहना है कि जिनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की वे चिकित्सक
लंबे समय से ईमानदारी से अपना काम कर रहे है। ऐसे में उनके खिलाफ कार्रवाई करना सभी
चिकित्सकों का मनोबल तोड़ने जैसा है।
चिकित्सकों का कहना है कि एक चिकित्सक को दो-दो
जिम्मेदारी दी गई है। उसके बाद भी वे मेहनत से अपना काम निभा रहे है। ऐसे चिकित्सकों
को प्रोत्साहित करने की बजाय उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करना गलत है। यह सिस्टम
की कमी है न की चिकित्सकों की। इस अवसर पर डा. सुरेंद्र बिश्नोई, डा. अजीत लाठर, डा.
प्रभुदयाल, डा. सुनील व डा. प्रशांत सहित अन्य भी मौजूद थे। उन्होंने ऐलान किया कि
जब तक आदेश वापस नहीं लिए जाते सभी चिकित्सक काले बिल्ले लगाकर मरीजों का उपचार करेंगे।