चूरू बनेगा यूएनसीसीडी कोप-17 प्री-कोप संवाद का राष्ट्रीय मंच, गंगनहर के 100 वर्ष पर होगा राष्ट्रीय मंथन

जयपुर, 25 जुलाई । केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल की पहल पर चूरू में पहली बार संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (यूएनसीसीडी) के कोप-17 से पहले राष्ट्रीय स्तर का प्री-कोप संवाद आयोजित किया जाएगा। गंगनहर की स्थापना के शताब्दी वर्ष (1927–2027) के उपलक्ष्य में 26 जुलाई को ‘ए कंट्री ऑफ द गंग कैनाल : लैंड, वाटर एंड क्लाइमेट रेसिलियंस इन द थार डेजर्ट’ विषय पर यह महत्वपूर्ण संवाद ग्रैंड शेखावाटी होटल में सुबह 9:15 बजे से शाम 5:30 बजे तक होगा।

कार्यक्रम का आयोजन अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकॉलॉजी एंड द एनवायरनमेंट (एटीआरईई) तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से किया जा रहा है। इसमें भूमि पुनर्स्थापन, जल प्रबंधन, मरुस्थलीय पारिस्थितिकी, घासभूमि संरक्षण और जलवायु सहनशीलता जैसे विषयों पर देश के प्रमुख वैज्ञानिक, नीति-निर्माता और विशेषज्ञ मंथन करेंगे।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बताया कि थार मरुस्थल के मध्य स्थित चूरू देश के सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। ताल छापर की विश्व प्रसिद्ध घासभूमि और समृद्ध जैव विविधता इस आयोजन के लिए उपयुक्त पृष्ठभूमि प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को ‘अंतरराष्ट्रीय रेंजलैंड एवं पशुपालक वर्ष’ घोषित किया गया है। ऐसे महत्वपूर्ण वर्ष में आयोजित यह प्री-कोप संवाद थार की घासभूमियों, रेंजलैंड संरक्षण, पशुपालक समुदायों और सतत भूमि प्रबंधन को वैश्विक प्राथमिकताओं से जोड़ने का कार्य करेगा।

उद्घाटन सत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के मरुस्थलीकरण प्रकोष्ठ के डीआईजी प्रशांत राजगोपाल भूमि क्षरण तटस्थता (लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी) लक्ष्यों की रूपरेखा प्रस्तुत करेंगे।

राजस्थान के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी. अरुण प्रसाद भी उद्घाटन सत्र को संबोधित करेंगे। इसके बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल मुख्य वक्तव्य देंगे और अर्द्ध-शुष्क क्षेत्रों की सामाजिक एवं पारिस्थितिक विरासत पर आधारित विशेष कलाकृति का लोकार्पण करेंगे।

तकनीकी सत्र में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र पश्चिमी राजस्थान में एक शताब्दी के सतत जल प्रबंधन से आए जलवायु परिवर्तनों पर व्याख्यान देंगे।

वहीं अटारी, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, सीआईएएच, आईजीएफआरआई, एएफआरआई तथा एसएसी-इसरो सहित विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञ गंगनहर के इतिहास, भूमि उपयोग में बदलाव, घासभूमि संरक्षण, चारा सुरक्षा, जैव विविधता, गोडावण संरक्षण और उपग्रह आधारित भूमि परिवर्तन विश्लेषण जैसे विषयों पर अपने विचार रखेंगे।

दोपहर बाद आयोजित राउंडटेबल सत्र में अगले सौ वर्षों के लिए थार क्षेत्र की विकास रणनीति पर मृदा स्वास्थ्य, लवणीयता नियंत्रण, जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल कृषि, घासभूमि पुनर्स्थापन, रेंजलैंड प्रबंधन और पशुपालन से जुड़े नीतिगत विषयों पर व्यापक चर्चा होगी। समापन सत्र में जिला प्रशासन चूरू के हीट एक्शन प्लान की प्रस्तुति देगा, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समापन संबोधन करेंगे।