शिवालयों के निर्माल्य से बनेगी जैविक खाद, जयपुर नगर निगम ने शुरू किया ‘शिवार्पणम्’ अभियान

जयपुर, 29 जुलाई । शिवालयों में भगवान शिव को अर्पित किए जाने वाले बिल्वपत्र, पुष्प और अन्य जैविक निर्माल्य अब कचरे का हिस्सा नहीं बनेंगे, बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया से इन्हें जैविक प्रसाद खाद में परिवर्तित कर पुनः श्रद्धालुओं तक पहुंचाया जाएगा। जयपुर नगर निगम ने बुधवार को ‘शिवार्पणम्’ अभियान की शुरुआत की। निगम का उद्देश्य धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।

सावन माह में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु शिवालयों में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना करते हैं। इस दौरान बड़ी मात्रा में बेलपत्र, पुष्प और अन्य जैविक निर्माल्य एकत्र होता है। अब इन पवित्र अवशेषों को वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से करीब 30 दिनों में जैविक खाद में बदला जाएगा। अभियान के तहत प्रत्येक सोमवार को चयनित मंदिरों से नगर निगम का ईवी हॉपर निर्माल्य संग्रह करेगा। इसके बाद सामग्री को नजदीकी उद्यानों में स्थापित श्रेडर मशीन से प्रोसेस किया जाएगा और कम्पोस्ट पिट में वैज्ञानिक विधि से जैविक खाद तैयार की जाएगी। तैयार खाद को ‘शिवार्पणम्’ पैकेट के रूप में श्रद्धालुओं और नागरिकों तक पहुंचाया जाएगा। पायलट परियोजना के तहत ताड़केश्वर महादेव, झारखंड महादेव, जंगलेश्वर महादेव, चमकारेश्वर महादेव और रोजगारेश्वर महादेव मंदिरों से अभियान की शुरुआत की गई है। यह अभियान पूरे श्रावण मास में प्रत्येक सोमवार संचालित किया जाएगा।

नगर निगम जयपुर के आयुक्त ओम कसेरा ने कहा कि भगवान शिव को अर्पित प्रत्येक बेलपत्र और पुष्प श्रद्धा का प्रतीक है। उसका स्थान कचरे में नहीं, बल्कि धरती की सेवा में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘शिवार्पणम्’ आस्था, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ने वाला एक अभिनव मॉडल है।