नीट पेपर लीक मामले में तीन आरोपिताें के लाई डिटेक्टर टेस्ट की नहीं मिली अनुमति

कोर्ट ने तीनाें आरोपित- मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल की लाई डिटेक्टर टेस्ट और ब्रेन मैपिंग करने की मांग खारिज कर दिया। तीनों आरोपिताें के वकील एपी सिंह ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत आरोपिताें को निष्पक्ष ट्रायल का अधिकार है। सुनवाई के दौरान केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस अर्जी का विरोध करते हुए कहा कि ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। सरकार इस मामले की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन कर चुकी है।

कोर्ट ने आज चार्जशीट पर संज्ञान लेने पर आदेश टालते हुए 12 अगस्त को आदेश सुनाने का आदेश दिया। चार्जशीट पर सुनवाई के दौरान सीबीआई की ओर से कहा गया था कि इस मामले में 12 मई को एफआईआर दर्ज की गई थी जिसके तुरंत बाद 72 अफसरों और आठ साइबर फोरेंसिक विशेषज्ञों की मदद से जांच शुरु की गई। सीबीआई ने महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और दूसरे राज्यों के 92 स्थानों पर छापे मारे। इस मामले में पहली गिरफ्तारी 13 मई को की गई थी।

सीबीआई ने 13 लोगों को आरोपी बनाया है। सीबीआई ने जिन लोगों को आरोपी बनाया है उनमें यश यादव, मांगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल, विकास बिवाल, शुभम खैरनार, धनंजय लोखंडे, प्रहलाद कुलकर्णी, तेजस हर्षद कुमार, डॉ. मनोज शिरुरे, शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, मनीषा वाघमारे, मनीषा मंधारे और मनीषा संजय हवलदार शामिल हैं। ये सभी आरोपी अभी न्यायिक हिरासत में हैं। सीबीआई ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 315(5), 318(4), 61(2), 238, 303(2), भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धारा 13(2) और 13(1)(ए) और पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) एक्ट की धारा 10 ,धारा 3, 4, 5 और 11 के तहत एफआईआर दर्ज की थी।

उल्लेखनीय है कि 24 जुलाई को दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीट पेपर लीक मामले की तेजी से सुनवाई के लिए राऊज एवेन्यू कोर्ट में फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का आदेश दिया था।