रूस ने फिर दिखाई मिसाइल ताकत, आईसीबीएम से साधा हजारों किमी का लक्ष्य

मॉस्को, 29 अगस्त । रूस ने इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) का सफल परीक्षण किया है। मिसाइल को उत्तर-पश्चिमी अर्खांगेल्स्क क्षेत्र स्थित प्लेसेत्स्क कॉस्मोड्रोम से लॉन्च किया गया और इसका टेस्ट वॉरहेड देश के सुदूर पूर्व में कामचटका प्रायद्वीप स्थित कुरा ट्रेनिंग रेंज तक पहुंचा।

रूस की अंतरराष्ट्रीय समाचार टेलीविजन नेटवर्क रशिया टुडे (आरटी) ने रक्षा मंत्रालय के शुक्रवार को जारी बयान के हवाले से बताया कि परीक्षण के दौरान निर्धारित सभी लक्ष्य और कार्य पूरी तरह हासिल किए गए। मंत्रालय के अनुसार, परीक्षण से मिसाइल की तकनीकी क्षमता और उड़ान संबंधी विशेषताओं की पुष्टि हुई है।

रूस ने परीक्षण में इस्तेमाल की गई मिसाइल का सटीक नाम नहीं बताया। हालांकि, मंत्रालय ने इसे मोबाइल-लॉन्च सॉलिड-फ्यूल सिस्टम बताया है। यह परीक्षण रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स की एक ट्रेनिंग एक्सरसाइज का हिस्सा था। अभ्यास के दौरान एक मोबाइल आईसीबीएम लॉन्च बैटरी को दूरदराज के इलाके में तैनात किया गया, जिसके बाद मिसाइल लॉन्च करने की पूरी प्रक्रिया को अंजाम दिया गया।

रूस इससे पहले अपनी अत्याधुनिक आरएस-28 सरमत आईसीबीएम का परीक्षण कर चुका है। रिपोर्टों के मुताबिक, सरमत कई री-एंट्री व्हीकल्स के जरिए भारी परमाणु वॉरहेड ले जाने में सक्षम है। इसे रूस की रणनीतिक परमाणु क्षमता का अहम हिस्सा माना जाता है।

रिपोर्टों के अनुसार, सरमत के साथ हाइपरसोनिक ग्लाइडर तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। ऐसी तकनीक से लैस वॉरहेड बेहद तेज गति से लक्ष्य की ओर बढ़ सकता है और एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने के लिए अपनी दिशा में बदलाव कर सकता है।

रूस की स्ट्रैटेजिक मिसाइल फोर्स के कमांडर जनरल सर्गेई काराकाएव ने कहा है कि रूसी सेना साल के अंत तक अपनी पहली मिसाइल रेजिमेंट को नए हथियार सिस्टम से लैस करने की तैयारी कर रही है।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले आरएस-28 सरमत को रूस का बेहद शक्तिशाली मिसाइल सिस्टम बता चुके हैं। उन्होंने दावा किया था कि यह बड़ी मात्रा में पेलोड ले जाने में सक्षम है और इसकी लंबी दूरी रूस की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करती है।

पुतिन के मुताबिक, रूस ने अपनी मिसाइल क्षमताओं के विकास पर इसलिए जोर दिया क्योंकि मॉस्को को बदलते सुरक्षा माहौल में अपनी रणनीतिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने इन प्रयासों को रणनीतिक शक्ति संतुलन बनाए रखने से जोड़ा है।

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