न्यूयॉर्क, 30 अगस्त । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने आज कहा कि भारत के लिए एकता और विविधता-दोनों उसके स्वभाव में ही अन्तर्निहित हैं। संघ प्रमुख ने कहा कि राष्ट्र केवल भौगोलिक इकाइयां नहीं होते। राष्ट्र एक दायित्व का निर्वाह करते हैं। स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि प्रत्येक राष्ट्र के पास संसार को देने के लिए एक संदेश, पूर्ण करने के लिए एक ध्येय और साकार करने के लिए एक नियति होती है। उन्होंने यह विचार यहां के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘एहेड फोरम’ के तत्वावधान में आयोजित सार्वभौमिक एकात्मता समारोह में व्यक्त किए।
डॉ. भागवत के उद्बोधन के प्रमुख बिंदु