नई दिल्ली, 01 सितंबर । केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि दुनिया में प्राकृतिक खेती उत्पादों की बढ़ती मांग भारत के किसानों के लिए बड़ा अवसर है। प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों की आय वृद्धि करने के लिए समग्र प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती को व्यापक जन-आंदोलन के रूप में विकसित करने के लिए केंद्र और राज्यों को समन्वित रूप से कार्य करना होगा, जिससे किसानों की आय बढ़े, कृषि लागत कम हो और देश में टिकाऊ कृषि प्रणाली को बढ़ावा मिल सके।
कृषि मंत्री चौहान मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक के दौरान प्राकृतिक खेती से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों एवं राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने प्राकृतिक खेती के विस्तार, किसानों के पंजीकरण एवं प्रमाणन, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्रशिक्षण, अनुसंधान, बाजार संपर्क, किसान उत्पादक संगठनों तथा प्राकृतिक खेती के आर्थिक प्रभावों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की।
बैठक में प्राकृतिक खेती के अंतर्गत अब तक हुई प्रगति, राज्यों में चल रही गतिविधियों, किसानों की भागीदारी तथा मिशन के आगामी लक्ष्यों पर प्रस्तुति दी गई। इसमें बताया गया कि वर्तमान में देशभर में 24 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं। राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक 85 लाख किसानों को प्राकृतिक खेती से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। मिशन के आगामी चरणों में प्राकृतिक खेती के विस्तार को और गति देने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
चौहान ने कहा कि प्राकृतिक खेती को केवल एक कृषि पद्धति के रूप में नहीं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और कृषि को अधिक टिकाऊ बनाने के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक खेती से किसानों को होने वाले वास्तविक लाभों का व्यापक एवं वैज्ञानिक आकलन किया जाए।
उन्होंने कहा कि किसानों की उत्पादकता, उत्पादन लागत, बाजार मूल्य और शुद्ध आय का तुलनात्मक अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि यह स्पष्ट रूप से सामने आ सके कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए किस प्रकार लाभकारी सिद्ध हो रही है। किसानों के अनुभवों, वैज्ञानिक अध्ययनों तथा जमीनी स्तर के आंकड़ों को एकत्र कर व्यापक विश्लेषण किया जाए, जिससे प्राकृतिक खेती के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों का स्पष्ट दस्तावेज तैयार किया जा सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि विश्वभर में प्राकृतिक एवं रसायन-मुक्त कृषि उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत के किसानों के पास इस बढ़ती मांग का लाभ उठाने का बड़ा अवसर है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित वस्तुओं की ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन तथा बाजार संपर्क को मजबूत कर किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। इसमें प्राकृतिक खेती उत्पादों के विपणन, निर्यात संभावनाओं तथा विभिन्न राज्यों द्वारा विकसित किए गए सफल बाजार मॉडलों पर भी चर्चा की गई।
इसमें पीजीएस-भारत प्राकृतिक सर्टीफेकशन सिस्टम के अंतर्गत किसानों के पंजीकरण और प्रमाणन की प्रगति की समीक्षा की गई। इसमें बताया गया कि 80,034 किसानों का पंजीकरण किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 100 प्राकृतिक खेती आधारित एफपीओ तथा 162 जैविक खेती आधारित एफपीओ सहित कुल 262 एफपीओ प्रमाणन प्रणाली से जुड़े हैं।
बैठक में नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत प्राकृतिक खेती की प्रगति तथा कृषि विश्वविद्यालयों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में प्राकृतिक खेती को मुख्यधारा में लाने से संबंधित प्रयासों की समीक्षा की गई। साथ ही प्राकृतिक खेती के लिए प्रस्तावित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से संबंधित प्रगति की भी समीक्षा की गई। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना से संबंधित प्रक्रियाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए ताकि अनुसंधान, नवाचार, क्षमता निर्माण तथा तकनीकी सहयोग को और अधिक गति मिल सके।
समीक्षा बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव अतिश चंद्र सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा अन्य संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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