नई दिल्ली, 07 अक्टूबर । दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी में इमारतों की संरचनात्मक सुरक्षा और समय-समय पर होने वाले ऑडिट से जुड़े कानूनी ढांचे के बारे में स्पष्टता मांगी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे की अध्यक्षता वाली बेंच ने सत्य निकेतन जैसी घटनाओं पर गौर करते हुए प्राधिकारों से 28 अक्टूबर तक जवाब तलब किया है।
इंद्रप्रस्थ रेनेसां ट्रस्ट की याचिका में दिल्ली में लगातार इमारतों के गिरने पर चिंता जताते हुए संरचनात्मक एवं आग से सुरक्षा के समयबद्ध एवं समग्र उपायों पर दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की गई है। सत्य निकेतन इमारत गिरने का हादसा 6 सितंबर को हुआ था, जिसमें मलबे में कई छात्र दब गए थे। उसके बाद 7 सितंबर को दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम को निर्देश दिया था कि वो दक्षिणी दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत के अचानक भरभराकर गिरने के मामले की उच्च-स्तरीय जांच करे।
न्यायालय ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वो इस हादसे में फंसे छात्रों को बचाने के काम में तेजी लाए। उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को चेतावनी देते हुए कहा था कि राज्य सरकार इस मामले की जिम्मेदारी से बच नहीं सकती।
उच्च न्यायालय ने दिल्ली नगर निगम को उच्च स्तरीय जांच का आदेश देते हुए कहा था कि इस हादसे की जिम्मेदारी तय की जाए। न्यायालय ने कहा था कि इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ क्या किया गया? ये न्यायालय को सूचित करें। उच्च न्यायालय ने इस बात पर अफसोस जताया था कि हर दो साल के बाद दिल्ली में ऐसी घटनाएं हो रही हैं। आखिर दिल्ली सरकार ऐसे हादसों को रोकने के लिए क्या कर रही है।
