भोपाल, 15 अक्टूबर । मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गुरुवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में अन्नदाताओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन उत्पादक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दिलाने के लिए ‘पीएम-आशा’ योजना अन्तर्गत भावांतर भुगतान योजना लागू करने की स्वीकृति दी गई।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रि-परिषद ने किसानों को खरीफ वर्ष 2026 में सोयाबीन का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर योजना लागू किए जाने की स्वीकृति दी है। यह योजना भारत सरकार के ‘प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान’ ( पीएम-आशा) के तहत संचालित ‘प्राइस डिफिसिट पेमेंट स्कीम’ (पीडीपीएस) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लागू की जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को उनकी औसत गुणवत्ता वाली सोयाबीन उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित कराना है।
उन्होंने बताया कि योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए सोयाबीन उत्पादक किसानों को खाद्य विभाग के ई-उपार्जन पोर्टल पर 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। योजना के अंतर्गत अधिसूचित मंडियों में उपज की विक्रय अवधि 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक निर्धारित की गई है जिसे आवश्यकता पड़ने पर संशोधित किया जा सकेगा। योजना के तहत किसानों को भुगतान उनके पंजीकृत रकबे और विगत वर्ष विभाग द्वारा निर्धारित राज्य स्तरीय औसत उत्पादकता के आधार पर किया जाएगा। किसी किसान ने यदि योजना अवधि से पूर्व यानी 01 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 के बीच मंडी में सोयाबीन बेची है तो उस मात्रा को उसकी कुल पात्रता सीमा में से घटाकर केवल शेष मात्रा पर ही भावांतर राशि का भुगतान मान्य किया जाएगा।
योजना में भुगतान प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए मॉडल रेट की व्यवस्था लागू की गई है। सीजन के प्रथम 14 दिनों के लिए मॉडल रेट का निर्धारण प्रदेश की सभी मंडियों के भारित औसत के आधार पर किया जाएगा जो 22 अक्टूबर 2026 से आगामी 14 दिनों तक प्रभावी रहेगा। इसके बाद प्रतिदिन विगत 14 दिनों के भारित औसत के आधार पर मॉडल रेट तय कर उसे ई-मंडी पोर्टल पर प्रदर्शित किया जाएगा। मंडी में बिक्री मूल्य यदि एमएसपी के बराबर या उससे अधिक रहता है तो कोई प्रतिपूर्ति नहीं दी जाएगी। बिक्री मूल्य यदि एमएसपी से कम लेकिन मॉडल रेट से अधिक रहता है तो किसान को एमएसपी और वास्तविक बिक्री मूल्य के अंतर की राशि मिलेगी। वहाँ बिक्री मूल्य मॉडल रेट के बराबर या कम होने पर किसान को एमएसपी और घोषित मॉडल रेट के अंतर की राशि सीधे उनके पंजीकृत बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जाएगी। योजना के सफल संचालन के लिए राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर कलेक्टर की अध्यक्षता में क्रियान्वयन समितियां गठित की जाएंगी।
भावांतर राशि का भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी मंडी बोर्ड द्वारा किया जाएगा। जिसकी प्रतिपूर्ति सबसे पहले राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड द्वारा संचालित मूल्य स्थिरीकरण कोष से होगी। कोष में राशि अपर्याप्त होने की स्थिति में राज्य शासन द्वारा मंडी बोर्ड को 1500 करोड़ रुपये की साख सीमा (क्रेडिट लिमिट) एक वर्ष के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि मंत्रि-परिषद ने विधि एवं विधायी कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न योजनाओं की 16वें वित्त आयोग की अवधि एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 के लिये निरंतरता के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके अलावा मंत्रि-परिषद ने सामान्य प्रशासन विभाग अन्तर्गत राज्य सूचना आयोग की स्थापना और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण संबंधी योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि वित्तीय वर्ष 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक निरंतर जारी रखने के लिए 71 करोड़ 81 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार राज्य सूचना आयोग के अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन भत्ते आदि व्यय संबंधी योजना के लिए 69 करोड़ 61 लाख रुपये और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 2 करोड़ 20 लाख रुपये स्वीकृत किए गए है।
राष्ट्रीय आयुष मिशन के निरंतर संचालन के लिए 1,697.62 करोड़ रुपये की स्वीकृति
मंत्रि-परिषद ने राष्ट्रीय आयुष मिशन को 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 1,697 करोड़ 62 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। राष्ट्रीय आयुष मिशन, भारत सरकार, आयुष मंत्रालय द्वारा आयुष पद्धति को मुख्य धारा में लाने के लिए प्रारंभ की गई है। प्रदेश में इस योजना से आयुष, चिकित्सालय एवं औषधालय, महाविद्यालय के विकास एवं नवीन स्थापना के लिए आवश्यक निधि प्राप्त होती है। राष्ट्रीय आयुष मिशन के अंतर्गत स्वीकृत 7 आयुर्वेद महाविद्यालय एवं जिला खनिज प्रतिष्ठान निधि से 1 आयुर्वेद महाविद्यालय का निर्माण कार्य जिला डिण्डोरी में किया जा रहा है।
वहीं, मंत्रि-परिषद ने आयुष विभाग की आयुष महाविद्यालय और चिकित्सालय से संबंधित अम्ब्रेला योजना की 16वें केन्द्रीय वित्त आयोग की अवधि एक अप्रैल , 2026 से 31 मार्च, 2031 तक के लिए निरंतर संचालन के लिए 3,535 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। इसके अलावा मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के शासकीय स्कूल, छात्रावास, पुस्तकालय, आवासीय खेलकूद भवनों के निर्माण और विस्तार से संबंधित योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक निरंतर संचालन के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है। प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के अधीन कुल 7122 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूल संचालित है। योजना के क्रियान्वयन से शासकीय हाई और हायर सेकेण्डरी स्कूलों में शिक्षण कक्ष, प्रयोगशाला, पुस्तकालय एवं कम्प्यूटर कक्ष, प्राचार्य, स्टॉफ रूम और कैंपस निर्माण के साथ-साथ शिक्षण कक्षों में विद्यार्थियों के बैठने के लिए फर्नीचर, ग्रीन बोर्ड, इंटरेक्टिव पैनल, एवं सुरक्षा के लिए कैमरे आदि की व्यवस्था होने से विद्यार्थियों को सुविधायें प्राप्त होगी।
