सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा के बिल्डर की जमानत याचिका पर ईडी को जारी किया नोटिस

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर । उच्चतम न्यायालय ने नोएडा की एक रियल एस्टेट कंपनी के मुख्य प्रमोटर अनिल मिठास की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को नोटिस जारी किया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया।

मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें घर खरीदारों के 126.30 करोड़ कथित तौर पर दूसरी जगह डायवर्ट करने का आरोप है। मिठास ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 16 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।

अपने आदेश में उच्च न्यायालय ने कहा था कि व्हाइट-कॉलर अपराध इतने व्यापक और इतने नुकसानदेह हो गए हैं कि इनसे निपटने के लिए सख्त और बिना किसी समझौते के की जाने वाली कार्रवाई ही एकमात्र रास्ता है। कॉर्पोरेट धोखाधड़ी, गबन, इनसाइडर ट्रेडिंग और बड़े पैमाने पर की गई वित्तीय जालसाजी अक्सर लोगों की पेंशन, बचत और आजीविका को इस तरह बर्बाद कर देती है कि इसके सामने सड़क पर होने वाले कई अपराधों से होने वाला नुकसान बहुत छोटा लगने लगता है। फिर भी, अक्सर अपराधियों को बहुत हल्की सजा मिलती है, या उन पर ऐसा जुर्माना लगाया जाता है जिसे उनकी कंपनियां कारोबार की लागत मानकर आसानी से चुका देती हैं, या फिर वे समझौता कर लेते हैं, जिससे वे असल जवाबदेही से बच जाते हैं।

यह मामला उन आरोपों से जुड़ा है, जिनके अनुसार मिठास ने ‘उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड’ द्वारा अपने ‘अरण्य’ प्रोजेक्ट के लिए घर खरीदारों से जुटाई गई रकम को कहीं और डायवर्ट कर दिया था। मिठास को 16 अप्रैल, 2025 को हिरासत में ले लिया गया।

यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी द्वारा दर्ज की गई एफआईआर से सामने आया है। यह एफआईआर ‘उन्नति फॉर्च्यून होल्डिंग्स लिमिटेड’ और उसके प्रमोटरों के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोपों को लेकर दर्ज की गई थी।