नई दिल्ली, 23 फरवरी (हि.स.)। अभिलेखागार महानिदेशक अरुण सिंघल के नेतृत्व में भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई), नई दिल्ली के एक प्रतिनिधिमंडल ने ओमान के नेशनल रिकॉर्ड्स एंड आरकाइव्ज अथॉरिटी (एनआरएए) का दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल में उप-निदेशक डॉ. संजय गर्ग और आरकाइविस्ट सदफ फातिमा शामिल थीं। यह दौरा 21 और 22 फरवरी को किया गया। इसका उद्देश्य पुरालेख क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों का पता लगाना था।
संस्कृति मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न अनुभागों एवं प्रभागों का भ्रमण कराया गया। इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेज़ प्रबंधन प्रणाली (ईडीआरएमएस) अनुभाग, माइक्रोफिल्म विभाग, निजी रिकॉर्ड अनुभाग, रिकॉर्ड विभाग तक पहुंच, इलेक्ट्रॉनिक भंडारण और संरक्षण अनुभाग सहित एनआरएए के विभिन्न प्रभागों के प्रभारियों द्वारा प्रतिनिधिमंडल को विशेष प्रस्तुतियां दी गईं। प्रतिनिधिमंडल ने अभिलेखों की स्थायी प्रदर्शनी और दस्तावेज़ विनाश प्रयोगशाला का भी दौरा किया।
एनआरएए के अध्यक्ष डॉ. हम्द मोहम्मद अल-ज़ौयानी के साथ द्विपक्षीय वार्ता में अरुण सिंघल ने भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा की और डॉ. हम्द मोहम्मद अल-ज़ौयानी को राष्ट्रीय अभिलेखागार में ओमान से संबंधित बड़ी संख्या में रिकॉर्ड की मौजूदगी के बारे में भी जानकारी दी। सद्भावना व्यक्त करते हुए सिंघल ने ओमान से संबंधित 70 चुनिंदा दस्तावेजों की एक सूची सौंपी, जो भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार (एनएआई) में उपलब्ध हैं। ये दस्तावेज़ 1793 से 1953 तक की अवधि को कवर करते हैं और कई विषयों से संबंधित हैं। सूची के साथ, रिकॉर्ड की 523 पृष्ठों की प्रतियां भी अध्यक्ष, एनआरएए को सौंपी गईं, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषय शामिल थे। इसमें ओमानी ध्वज का लाल से सफेद रंग में परिवर्तन (1868), सुल्तान सैय्यद तुर्की की मृत्यु (1888) के बाद ओमान के शासक के रूप में सैय्यद फैसल बिन तुर्की का उत्तराधिकार, मस्कट और ओमान के सुल्तान की भारत में वायसराय के साथ मुलाकात (1937 शामिल है।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच तीन महत्वपूर्ण संधियों के प्रतिकृति प्रिंट भी एनआरएए को उपहार में दिए गए थे। इसमें 5 अप्रैल, 1865 में ब्रिटिश भारत सरकार और मस्कट के सुल्तान के बीच संधि (अरबी और अंग्रेजी में), मस्कट के इमाम के साथ दो संधियां संपन्न हुईं, जिसमें 12 अक्टूबर, 1798 को एक मेहदी अली खान द्वारा और दूसरी 18 जनवरी, 1800 को सर जॉन मैल्कम द्वारा किया जाना शामिल है।
एनएआई के महानिदेशक और एनआरएए के अध्यक्ष ने दोनों देशों के बीच संस्था से संस्थान सहयोग को औपचारिक रूप देने की आवश्यकता को रेखांकित किया। विचार-विमर्श के बाद सहयोग के एक कार्यकारी कार्यक्रम (ईपीसी) के मसौदे को अंतिम रूप दिया गया, जिसे अब दोनों पक्षों के सक्षम अधिकारियों द्वारा अनुमोदन के लिए प्रस्तुत किया जाएगा और निकट भविष्य में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जाएंगे।