बरनाला जिले के ठुलीवाल गांव की दाना मंडी में धान की खरीद धीमी होने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के सदस्यों ने केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का आरोप है कि शासन प्रशासन उनकी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रहा है, जिससे वे परेशान और प्रभावित हो रहे हैं। यूनियन के विभिन्न ब्लॉक नेताओं, जैसे नाजर सिंह, मेवा सिंह भट्टी, जसपाल सिंह और अमरीक सिंह ने कहा कि ठुलीवाल मंडी में धान की बिक्री धीमी हो गई है, जिसके कारण किसानों का आर्थिक स्थिति बिगड़ रही है।
किसानों का यह भी कहना है कि पंजाब सरकार और केंद्र सरकार के बीच के राजनीतिक विवाद ने उनकी समस्याओं को और बढ़ा दिया है। इन नेताओं ने स्पष्ट किया कि प्रदेश और केंद्र की सरकारें एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं, जबकि किसान अपनी फसल को बेचने के लिए बेहद परेशान हैं। उन्होंने यह भी बताया कि चुनावों के समय राजनीतिक दलों की किसानों की समस्याओं की बजाय केवल उप चुनावों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
सरकारी खरीद 1 अक्टूबर को शुरू हुई थी, लेकिन 26 दिन बाद भी सरकार द्वारा उचित व्यवस्था नहीं की गई है। किसान अपनी फसलों को मंडी में कई दिनों तक रखकर बैठने के लिए मजबूर हो रहे हैं। धान में नमी के नाम पर किसानों को विभिन्न तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति और खराब होती जा रही है। ऐसे में, यूनियन के नेताओं ने सरकार से मांग की है कि धान की खरीद प्रक्रिया को शीघ्रता से पूरा किया जाए।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान जल्दी न किया गया, तो वे सड़कों पर धान फेंकने के लिए मजबूर हो सकते हैं। यह स्थिति किसानों के आत्मबल को और कमजोर कर रही है। सरकार को अब आवश्यक कदम उठाने होंगे, ताकि उनकी समस्या का समाधान हो सके और किसानों की मेहनत का उचित मूल्य मिल सके।
इस स्थिति ने किसान समुदाय में असंतोष को जन्म दिया है, जो अधिक समय तक सहन करने की स्थिति में नहीं है। इसलिए, सभी संबंधित पक्षों को इस मुद्दे का गंभीरता से समाधान निकालना होगा, अन्यथा किसान अपनी आवाज उठाने के लिए मजबूर होंगे। किसान आंदोलन और उनकी मांगों का महत्व समझते हुए सरकार को इस दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।