पंजाब CM मान की किसानों संग अहम बैठक: DGP की उपस्थिति, 16 लाख MTA धान खरीद चुके!

पंजाब में धान की खरीद प्रक्रिया में हो रही समस्याओं के खिलाफ कल, यानी शुक्रवार को कई किसान चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास के सामने प्रदर्शन करने पहुँचे। बड़ी संख्या में किसान सेक्टर-35 स्थित किसान भवन में इकट्ठा हुए, जिसके चलते पुलिस ने वहां के गेट बंद कर दिए। इस विवाद को सुलझाने के लिए आज शनिवार को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने किसानों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में पंजाब पुलिस के महानिदेशक गौरव यादव समेत अन्य उच्चाधिकारी भी सम्मिलित थे।

बैठक के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट किया कि इस वर्ष राज्य में धान की आवक की मात्रा लगभग 18.05 लाख मीट्रिक टन रहने की उम्मीद है। इसे दृष्टिगत रखते हुए राज्य भर में कुल 2651 मंडियों की स्थापना की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मंडियों में किसी प्रकार की बाधा के कारण धान की बिक्री प्रभावित नहीं होने दी जाएगी और इस संबंध में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। वर्तमान में 16.35 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हो चुकी है और किसानों को 3000 करोड़ रुपए का भुगतान भी किया जा चुका है।

हाल ही में किसानों ने संयुक्त किसान मोर्चा और आढ़ती एसोसिएशन के बैनर तले चंडीगढ़ में एक बैठक की थी, जिसमें संघर्ष की नई रणनीति बनाई गई थी। इस बैठक में यह तय किया गया कि यदि मंडियों में धान की खरीदी नहीं हुई, तो वे सीएम आवास का घेराव करेंगे। इसी योजना के तहत शुक्रवार को किसान चंडीगढ़ पहुंचे, लेकिन उन्हें पंजाब पुलिस द्वारा कई स्थानों पर रोका गया। इसके अतिरिक्त, चंडीगढ़ पुलिस ने कुछ किसान नेताओं को भी हिरासत में ले लिया, जिससे किसानों में आक्रोश और बढ़ गया।

वर्तमान स्थिति यह है कि मंडियों में किसानों को फसलों के ढेरों के बीच समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, और इसी कारण उन्होंने यह कदम उठाया। पंजाब सरकार ने भी शुक्रवार को सुबह से ही इस आंदोलन को टालने के प्रयास किए। इसके अंतर्गत, सरकार ने किसानों को मुख्यमंत्री भगवंत मान के साथ शाम पांच बजे बैठक करने का न्योता दिया। दरअसल, मुख्यमंत्री उस दिन दिल्ली में शिक्षक प्रशिक्षण के लिए फिनलैंड यात्रा पर थे। लेकिन किसानों ने अपनी मांगों पर अडिग रहते हुए सरकार के प्रयासों को नकार दिया।

इस तरह, पंजाब के किसान गहराते संकट के बीच अपनी आवाज उठाने के लिए संघर्षरत हैं। उनकी अधिकतर समस्याएं आवश्यक खरीद प्रक्रिया में होने वाले बाधाओं की वजह से उत्पन्न हुई हैं। सरकार की ओर से सख्त कार्रवाई का आश्वासन देने के बावजूद, किसानों की चिंता दूर नहीं हो सकी है, और ऐसी स्थिति में आने वाले दिनों में किसानों का आंदोलन और तेज होने की संभावना भी जताई जा रही है।