पंजाब की बरनाला विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए नामांकन दर्ज कराने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। आज, गुरुवार, को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार केवल ढिल्लों ने अपना नामांकन भरा। इसके बाद, कांग्रेस के काला ढिल्लों ने भी अपना नामांकन दाखिल किया। दोनों उम्मीदवारों ने इस मौके पर एक-दूसरे के सामने अपनी ताकत दिखाते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेसी उम्मीदवार काला ढिल्लों के साथ पूर्व मंत्री विजेंद्र सिंगला और सुरेंद्र पाल सिंह सिबीया भी मौजूद रहे, जो इस चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना रहे हैं। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 25 अक्टूबर है, जिसके मद्देनजर सभी पार्टियाँ अपने-अपने उम्मीदवारों की तैयारी कर रही हैं।
आम आदमी पार्टी के सांसद गुरमीत सिंह मीत हेयर इस सीट से पहले विधायक रह चुके हैं। उन्होंने हाल ही में लोकसभा चुनाव में भाग लिया, जिसमें वे सफल नहीं हो पाए थे। इस परिप्रेक्ष्य में, अब बरनाला विधानसभा सीट पर हुई इस उपचुनाव में सभी राजनीतिक दल उत्सुकता के साथ अपने उम्मीदवारों के प्रचार में जुट गए हैं। भाजपा के उम्मीदवार केवल ढिल्लों ने आज परिवार के साथ नामांकन कराया, और इस मौके से पहले उन्होंने शहर में एक बड़ी रैली निकाली, जिससे उनकी राजनीतिक स्थिति को उजागर किया जा सके।
केवल ढिल्लों पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के करीबी माने जाते हैं और बरनाला विधानसभा से 2007 और 2012 में विधायक चुने जा चुके हैं। हालांकि, 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के सामने हार का सामना करना पड़ा था। केवल ढिल्लों पेशे से एक व्यवसायी हैं और वे अपनी पत्नी तथा बेटों करण और कनवर के साथ चंडीगढ़ में निवास करते हैं। भाजपा ने जब से उन्हें इस बार का उम्मीदवार घोषित किया, तब से उनका पूरा परिवार बरनाला में चुनावी प्रचार में जुटा हुआ है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के काला ढिल्लों ने अपने नामांकन से पहले एक जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान, पूर्व मंत्री विजेंद्र सिंगला तथा सुरेंद्र पाल सिंह सिबीया उनकी ताकत को और बढ़ाते हुए उपस्थित रहे। काला ढिल्लों एक युवा नेता हैं और उन्होंने कांग्रेस के चुनाव कार्यालय का भी उद्घाटन किया। उनकी निकटता प्रदेश कांग्रेस के सीनियर नेताओं से दिखाई देती है, जो उनकी स्थिति को और मजबूत बनाती है। हालांकि, उपचुनाव के इस दौर में सभी पार्टियों को यह समझना होगा कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले सामरिक निर्णय लेना कितना महत्वपूर्ण है, ताकि वे अपनी स्थिति को मजबूती से प्रस्तुत कर सकें।
इस उपचुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच निर्णायक मुकाबला देखने को मिलेगा, जिसमें जनता के सामने अपने-अपने मुद्दों को लेकर दोनों दलों के नेता सक्रिय हैं। जनता की समस्याओं और मांगों को ध्यान में रखते हुए यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा उम्मीदवार जनता का विश्वास जीता पाता है। आने वाले दिनों में राजनीतिक माहौल और भी गरमाने की संभावना है।