VC हटाने की मांग पर भूख हड़ताल: पंजाब लॉ यूनिवर्सिटी विवाद में नया मोड़!

पंजाब के पटियाला में स्थित राजीव गांधी नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी (RGNUL) में वाइस चांसलर (VC) और छात्रों के बीच बढ़ते विवाद ने अब गंभीर रूप धारण कर लिया है। छात्र अपनी मांगों के समर्थन में अड़े हुए हैं, जिसमें वाइस चांसलर के हटाने की मांग विशेष रूप से प्रमुख है। छात्रों ने आरोप लगाया है कि इस मामले में करीब 17 दिन का समय बीतने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। नतीजतन, छात्रों ने भूख हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है, जिसमें वे अपने चेहरे पर मास्क लगाकर अपनी स्थिति का विरोध कर रहे हैं। उनका दृढ़ निश्चय है कि वे तब तक अपनी मांगों पर अड़े रहेंगे जब तक उन्हें सफलतापूर्वक समाधान नहीं मिलता।

यह विवाद 22 सितंबर से शुरू हुआ, जब छात्रों ने वाइस चांसलर पर आरोप लगाया कि उन्होंने बिना किसी महिला स्टाफ के गर्ल्स हॉस्टल में घुसकर जांच की। छात्रों का कहना है कि यह न केवल उनकी गोपनीयता का उल्लंघन था, बल्कि VC ने इस दौरान उनके छोटे कपड़ों पर भी टिप्पणियां कीं। वाइस चांसलर का कहना था कि उन्हें कुछ छात्राओं से शिकायतें मिली थीं, कि हॉस्टल में आधी रात के बाद कुछ लड़कियां सिगरेट और शराब का सेवन करती हैं। इस विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब महिला आयोग ने राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा, जिसमें इस मामले की गंभीरता को उजागर किया गया था।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर और करुणा नंदी ने भी इस विषय पर अपने विचार प्रकट किए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट के माध्यम से इस मामले की जांच की मांग की और सुझाव दिया कि जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक वाइस चांसलर को अपने पद से हटा देना चाहिए। इसी बीच, पंजाब महिला आयोग की अध्यक्ष ने विश्वविद्यालय का दौरा किया और छात्रों से बात की। उन्होंने वाइस चांसलर का पक्ष भी सुना और इसके बाद राष्ट्रपति को एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय के चांसलर को तत्काल प्रभाव से हटाने की सिफारिश की।

मुख्यमंत्री भगवंत मान भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। हाल ही में जब उनकी तबीयत खराब होने के कारण उन्हें फोर्टिस अस्पताल में भर्ती होना पड़ा, तो उन्होंने वहां से हड़ताल कर रहे छात्रों से बातचीत की। उन्होंने उन्हें विश्वास दिलाया कि इस मामले में उन्हें पूर्ण न्याय दिलाने की कोशिश की जाएगी। इसके आलावा, पंजाब के शिक्षामंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इस विवाद को लेकर रजिस्ट्रार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इस बीच, विश्वविद्यालय में एक समिति का गठन किया गया है, जो इस मामले की गहन समीक्षा कर रही है और सभी पक्षों की सुनवाई कर रही है।

इस विवाद ने न केवल विश्वविद्यालय के माहौल को प्रभावित किया है, बल्कि इसे उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक पारदर्शिता और छात्रों के अधिकारों पर भी सवाल उठाने के लिए मजबूर किया है। यह देखना होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या छात्रों की मांगें पूरी होती हैं।