पंजाब के तरनतारन जिले में पंचायत चुनाव से पहले एक युवक की हत्या ने पूरे क्षेत्र में सनसनी फैला दी है। मृतक युवक की पहचान राजविंदर सिंह उर्फ राज रूप के रूप में हुई है, जो कि पंजाब के कैबिनेट मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर का करीबी संबंधी था। घटना तब घटी जब वह अपने दोस्तों के साथ कार में लौट रहा था और बाइक सवार बदमाशों ने उन पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में राजविंदर की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उसके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका इलाज चल रहा है।
घटना लिए गए बयान के अनुसार, यह वारदात तलवंडी गाँव में हुई, जहाँ एक महिला को बिना चुनावी प्रक्रिया के सर्वसम्मति से सरपंच चुना गया था। राजविंदर, अपने दोस्तों के साथ, महिला सरपंच का समर्थन करने के लिए वहाँ गया था। जैसे ही वह वहाँ से वापस लौट रहा था, उसी समय हमलावरों ने उन पर हमला किया। पुलिस ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी इकट्ठा कर रही है। एसएसपी गौरव तुरा ने बताया कि यह घटना दोपहर करीब ढाई बजे की है।
गोलीबारी के बाद आरोपियों ने घटनास्थल से फरार होने में कोई देरी नहीं की। पुलिस ने बताया कि हमलावर मोटरसाइकिल पर आए थे और उन्होंने पहले राजविंदर से बातचीत की, फिर अचानक गोली चलाने लगे। आरोपियों ने अपना चेहरा नहीं ढका हुआ था, जिससे उनकी पहचान कर पाना संभव हो सकता है। इस हमले की जिम्मेदारी गोपी घनश्यामपुरिया गैंग ने ली है, जिन्होंने एक वायरल पोस्ट के जरिए इस दौरे की सूचना दी है। इस पोस्ट में उन्होंने उल्लेख किया कि यह बदला एक पिछले हत्या के कारण लिया गया है।
पंजाब सरकार के मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया और उन्होंने अधिकारियों को आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। इससे पहले, पंचायत चुनाव के दौरान, फाजिल्का के जलालाबाद में भी इसी तरह की स्थिति को लेकर हंगामा हुआ था, जहाँ आम आदमी पार्टी (AAP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी हुई और गोलीबारी की घटना घटित हुई थी। इस प्रकार की घटनाएँ पंजाब में चुनावी माहौल को और प्रशस्त कर रही हैं और कानून व्यवस्था की स्थिति को चुनौती दे रही हैं।
गाँवों में सरपंच पद के लिए आजकल काफी हलचल देखी जा रही है। गुरदासपुर जिले के हरदोवाल कलां में इस मामले में 2 करोड़ की बोली लगाई गई है, जहां भाजपा नेता आत्मा सिंह का कहना है कि यह बोली और भी बढ़ेगी। ऐसे में सरकार को चुनावी सुरक्षा के साथ-साथ शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी उठानी होगी। इस तरह की घटनाएँ न केवल राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित करती हैं बल्कि समाज में भय और अस्थिरता का माहौल भी बनाती हैं, जिससे जनता की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग जाता है।