चंडीगढ़ की साइबर सेल ने हाल ही में एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करते हुए लखनऊ से दो आरोपियों को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है। गिरफ्तार आरोपियों के नाम हमजा हरमैन और मोहम्मद असद हैं, जिन्होंने एक व्यक्ति से 52 लाख रुपये की ठगी की। यह मामला हाल ही में सामने आया है और इसमें अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिससे इस गिरोह का नेटवर्क स्पष्ट होता है।
पीड़ित हरिनाथ को ठगों ने फोन करके बताया कि उनके आधार कार्ड से संबंधित एक सिम कार्ड का उपयोग अवैध गतिविधियों में किया गया है। इसके पश्चात उन्हें एक फर्जी पुलिस अधिकारी से कनेक्ट कराया गया, जिसने उन्हें बाकायदा नरेश गोयल मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित के बैंक खाते में 6 करोड़ 80 लाख रुपये का संदिग्ध लेनदेन हुआ है, जिससे उनकी बेचैनी और बढ़ गई। इसी डर का लाभ उठाते हुए आरोपियों ने 52 लाख रुपये ठग लिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ठगी में साइबर अपराधी न केवल तकनीकी कौशल का उपयोग करते हैं, बल्कि मानसिक दबाव और भय पैदा करने की भी रणनीति बनाते हैं। जब हरिनाथ ने उन्हें अपने बैंक खाते से पैसे ट्रांसफर करने से पहले सब कुछ चेक करने का सोचा, तब आरोपियों ने उन्हें डराने-धमकाने और झांसे में डालने का अभियान चलाया। ऐसे में, पीड़ित ने आरटीजीएस, यूपीआई और नेट बैंकिंग के माध्यम से ठगों के विभिन्न खातों में 52 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने इस मामले में पहले से गिरफ्तार आरोपी हसनैन हैदर की पहचान के आधार पर लखनऊ में हमजा और असद को पकड़ा। जांच में यह भी सामने आया है कि इन दोनों आरोपियों के खिलाफ दिल्ली में भी धोखाधड़ी के कई मामले दर्ज हैं। पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है, ताकि इन अपराधियों के ग्रुप को पूरी तरह से खत्म किया जा सके।
गौरतलब है कि साइबर अपराध की यह घटना न केवल शहर की सुरक्षा पर सवाल उठाती है, बल्कि यह समाज में जागरूकता की जरुरत को भी उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि हमें ऑनलाइन लेन-देन में सतर्क रहने की आवश्यकता है और किसी भी संदिग्ध फोन कॉल या संदेश पर तुरंत सतर्क रहना चाहिए। इस तरह की ठगी से बचाव के लिए लोगों को अपनी व्यक्तिगत जानकारी को साझा करने से बचना चाहिए और अगर कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे, तो तुरंत संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।