दिल्ली चुनाव: सिख नेतृत्व का दबदबा, राजौरी गार्डन से पूर्व DSGMC अध्यक्ष विजयी!

दिल्ली विधानसभा चुनाव में पांच सिख उम्मीदवारों ने अपनी जगह बनाई है। इनमें से तीन सिख नेताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव जीतकर बड़ी सफलता हासिल की, जबकि आम आदमी पार्टी (आप) के दो सिख विधायक भी विधानसभा में पहुँचने में सफल रहे। महत्वपूर्ण यह है कि दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजिंदर सिंह सिरसा ने राजौरी गार्डन सीट से चुनाव जीतकर एक प्रमुख उपलब्धि हासिल की है। सिरसा ने पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को हराया, यह जीत इस बात का प्रमाण है कि सिख नेताओं की हिस्सेदारी दिल्ली के चुनावी परिदृश्य में बढ़ रही है।

भाजपा ने सिख नेताओं को चुनाव में उतारते हुए तीन टिकट दिए थे। वहीं, आम आदमी पार्टी ने चार सिख उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा था। हालांकि, भाजपा के सभी सिख उम्मीदवार सफल रहे, जबकि आप के केवल दो ही जीत सके। भाजपा नेता तरविंदर सिंह मारवाह, जो पहले कांग्रेस में थे, ने जंगपुरा सीट पर मनीष सिसोदिया को अत्यंत करीबी अंतर से हराया। सिसोदिया ने अपनी हार को स्वीकार करते हुए यह कहा कि परिणाम का सम्मान होना चाहिए।

अरविंदर सिंह लवली भी भाजपा के एक सफल उम्मीदवार रहे, जिन्होंने गांधी नगर सीट पर आप के नवीन चौधरी को मात दी। इन चुनावों में मनजिंदर सिंह सिरसा, जो पांच सबसे अमीर उम्मीदवारों में शामिल थे, ने राजौरी गार्डन सीट पर आम आदमी पार्टी की धनवती चंदेला को हराया। सिरसा को कुल 64,132 वोट मिले, जबकि चंदेला को 45,942 वोट मिले। सिरसा ने अपनी जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया और कहा कि जनता ने आप सरकार से छुटकारा पाया है।

आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की हार पर सिरसा ने कहा कि उन्हें लगता है कि केजरीवाल ईवीएम पर दोष मढने में व्यस्त हैं। इसके अलावा, चांदनी चौक और तिलक नगर सीट से आप के पुनरदीप सिंह साहनी और जरनैल सिंह ने जीत दर्ज की। हालांकि, तिमारपुर और शाहदरा में आप को हार का सामना करना पड़ा, जहां सुरेंद्र पाल सिंह और जितेंद्र सिंह शांति को टिकट दिया गया था।

इन चुनावों ने दिखाया कि सिख चेहरे कैसे दिल्ली के विधानसभा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। दोनों पार्टियों, भाजपा व आम आदमी पार्टी, ने सिख समुदाय की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी को ध्यान में रखते हुए अपने उम्मीदवारों का चयन किया था। इस तरह के नतीजे यह संकेत देते हैं कि सिख नेता न केवल अपनी पहचान बना रहे हैं, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में भी अपनी उपस्थिति को मजबूत कर रहे हैं। ये चुनाव परिणाम न केवल सिख समुदाय के लिए, बल्कि पूरे दिल्ली के राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।