फरीदकोट में गूंजेगा विरोध का शंखनाद: SSP ऑफिस घेरने की तैयारी, निकासी विवाद पर संग्राम!

पंजाब के फरीदकोट जिले के गांव चंदभान में हाल ही में मजदूरों और पुलिस के बीच हुई हिंसक टकराव की घटना ने क्षेत्र में तूफान खड़ा कर दिया है। यह विवाद पानी निकासी को लेकर धरना दे रहे मजदूरों और पुलिस के बीच हुआ, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। तीन दिन पहले हुई इस घटना के बाद, विभिन्न मजदूर और किसान संगठनों ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें चंदभान कांड विरोधी एक्शन कमेटी का गठन किया गया। यह समिति अब अपने अगले कदम के तहत 10 फरवरी को एसएसपी कार्यालय का घेराव करने का निर्णय लिया है।

घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 39 मजदूरों को गिरफ्तार किया है। लेकिन इस बीच, घटना के दिन के कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए हैं, जिनमें देखा जा सकता है कि एक दूसरे पक्ष के लोग पुलिस की मौजूदगी में मजदूरों पर पथराव और हवाई फायरिंग कर रहे हैं। इस स्थिति ने मामला और भी जटिल बना दिया है। समिति के नेताओं ने मांग की है कि थाना जैतो के एसएचओ राजेश कुमार को तत्काल बर्खास्त किया जाए और इस प्रकार की हिंसा को बढ़ावा देने वाले धनाढ्य भाइयों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

बैठक में पंजाब खेती मजदूर यूनियन, पेंडू मजदूर यूनियन, नौजवान भारत सभा और किरती किसान यूनियन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि उन मजदूरों पर दर्ज मामले को रद्द किया जाए, जिन्हें घटना के बाद गिरफ्तार किया गया है। इसके साथ ही, आंदोलनकारियों ने यह भी आवेदन किया है कि पीड़ित परिवारों को राहत और मुआवजा दिया जाए। उनकी मांग है कि घरों में हुई तोड़फोड़ का उचित मुआवजा दिया जाए, अन्यथा वे संघर्ष को और तेज करने के लिए बाध्य होंगे।

महिलाओं और बच्चों ने भी इस मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित परिवारों की महिलाओं का कहना है कि पुलिस ने न केवल मजदूरों के साथ मारपीट की, बल्कि बच्चों को भी थाने में ले जाकर प्रताड़ित किया। उनसे बर्तन से थप्पड़ मरवाने के दौरान उन्हें अपमानित किया गया। यह स्थिति इस बात का स्पष्ट संकेत है कि हालात बेहद गंभीर हैं और किसी समाधान की तलाश की जा रही है।

इस पूरे मामले में अब संगठन और स्थानीय समुदाय एकजुट होकर पुलिस की कार्रवाई के खिलाफ खड़े हो गए हैं। उनकी मुख्य मांगें स्पष्ट हैं, और यदि उनकी बातों को अनसुना किया गया तो वे आने वाले समय में और अधिक तीव्रता से विरोध प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। यह घटना न केवल मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा का सवाल है, बल्कि सामूहिक संघर्ष और एकता का प्रतीक भी बन चुकी है। ऐसे में देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कैसे कार्रवाई करता है और क्या वह पीड़ितों की समस्याओं का समाधान निकालने में सक्षम होता है।