फाजिल्का जिले के सरहदी गांव चूहड़ीवाला चिश्ती में श्मशान भूमि को लेकर एक विवाद ने जोर पकड़ लिया है। गांव की पंचायत का दावा है कि कुछ व्यक्तियों ने 40 साल पुरानी इस श्मशान भूमि की रजिस्ट्री अपने नाम करवाई है और वहां से अंतिम संस्कार के लिए स्थापित भट्टी को तोड़कर पेड़ों की कटाई का कार्य जोर-शोर से आरंभ कर दिया है। पंचायत के सरपंच जरनैल सिंह और सदस्य गुरसेवक सिंह ने मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि 1980 में एक व्यक्ति ने यह भूमि खरीदी थी। उस व्यक्ति के पुत्र की मृत्यु के बाद उसी स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया था। बाद में यह भूमि गांव के लोगों को समर्पित कर दी गई थी, तभी से यह भूमि श्मशान घाट के रूप में उपयोग में लाई जा रही है। इसके अलावा, गांव में एक सरकारी इमारत भी इस स्थल पर बनाई गई थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पंचायत ने स्थानीय विधायक नरेंदर पाल सवना से मिलकर औपचारिक शिकायत की है। विधायक ने तुरंत ही तहसीलदार से फोन पर संपर्क कर इस मुद्दे की निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है। उन्होंने आश्वासन दिया है कि इस मामले में कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। सरपंच जरनैल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह एक गंभीर मामला है, जो केवल सार्वजनिक संपत्ति के अतिक्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक और धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ा हुआ है। गांव के लोगों ने स्थानीय प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की गुहार लगाई है ताकि अंतिम संस्कार के लिए परेशानियों का सामना न करना पड़े।
गांव के लोग लंबे समय से इस भूमि का उपयोग अंतिम संस्कार के लिए कर रहे हैं, और अब जब कुछ लोगों ने इसे अपने निजी स्वामित्व में लेने की कोशिश की है, तो यह समुदाय के लिए चिंता का विषय बन गया है। पंचायत के सदस्य गुरसेवक सिंह ने बताया कि श्मशान भूमि का मामला केवल एक संपत्ति का विवाद नहीं है, बल्कि इससे गांव के लोगों की भावनाओं और परंपरा को भी ठेस पहुंच रही है। समाज के इस टकराव को सुलझाने के लिए प्रशासनिक कार्रवाइयों की आवश्यकता है।
इस बीच, स्थानीय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए आवश्यक जांच शुरू कर दी है। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही उचित समाधान निकलेगा और गांव के लोगों की आस्था और परंपराओं की रक्षा की जाएगी। गांव की पंचायत के सदस्य और सरपंच इस मामले में लगातार प्रशासनिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि श्मशान भूमि पर कोई भी अवैध गतिविधि न हो सके और स्थानीय लोगों को अंतिम संस्कार के लिए कोई कठिनाई न उठानी पड़े। इस मुद्दे पर गांववासियों की एकजुटता और प्रशासन की तत्परता दोनों ही महत्वपूर्ण हैं।