चंडीगढ़ में मंगलवार को राजनीतिक गतिविधियों का दौर जारी रहा। भाजपा से संबंधित मेयर हरप्रीत कौर बाबला ने प्रशासक गुलाब चंद कटारिया के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जो लगभग 45 मिनट तक चली। इस दौरान चंडीगढ़ के विकास पर विचार-विमर्श किया गया। मेयर हरप्रीत कौर ने इस मीटिंग के बाद प्रशासक से आग्रह किया कि लाल डोरे के बाहर स्थित मकानों में जलसंस्थान की किल्लत को दूर किया जाए। उन्होंने बताया कि वहां बिजली के कनेक्शन तो प्रदान किए गए हैं, लेकिन residents को जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, उन्होंने शहर की सीमाओं में स्थित गांवों में निर्माण कार्य और किसानों को उनकी भूमि के उचित मुआवजे की आवश्यकता की बात भी उठाई। मेयर ने दावा किया कि उनकी बैठक फलदायक रही और गवर्नर ने उन्हें अगले तीन दिनों में दूसरी मीटिंग के लिए बुलाया है।
दूसरी ओर, कांग्रेस के डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर ने भी एमसी कमिश्नर आईएएस अमित कुमार के साथ अपनी लंबी बैठक का जिक्र किया। यह बैठक मंगलवार की शाम को हुई, जिसमें तरुणा मेहता और जसबीर सिंह बंटी शामिल थे। सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर सिंह बंटी ने बैठक के बारे में कहा कि चंडीगढ़ में जून के बाद से कूड़े के पहाड़ दिखाई नहीं देंगे, क्योंकि उन्होंने अमित कुमार से सकारात्मक संवाद किया है। मीटिंग के दौरान, तरुणा मेहता ने शहर के विकास के लिए बेहतर सहयोग की आवश्यकता और नगर निगम की आर्थिक स्थिति के मुद्दे पर गंभीरता से सुझाव देने की बात रखी।
कांग्रेस अध्यक्ष हरमोहिंदर सिंह लक्की ने भी सभी पार्षदों से अनुरोध किया कि वे शहर की बेहतरी के लिए समन्वय बनाए रखें और मुख्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाएं। यह स्पष्ट है कि कांग्रेस के सभी पार्षद शहर के विकास में संलग्न हैं और इसके लिए तत्पर रहने का आश्वासन दे रहे हैं। वहीं, पार्षद सचिन गलव भी इस अवसर पर उपस्थित रहे।
हालांकि, इस बात पर चर्चा भी हुई है कि हाल ही में मिले बजट को दोनों पार्टी के नेता कम मान रहे हैं। उनका मानना है कि पिछली बार के बजट में कमी के कारण चंडीगढ़ में विकास कार्यों में रुकावट आई है। इस प्रकार, मंगलवार को भिन्न-भिन्न मीटिंग्स का आयोजन करने के पीछे क्या कारण है? क्या दोनों पार्टियां समय का सदुपयोग कर रही हैं या फिर कोई और महत्वपूर्ण मुद्दा इनके बीच चल रहा है?
इस पूरे परिदृश्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि चंडीगढ़ के विकास के मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पक्ष गंभीरता से विचार कर रहे हैं। दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों के बीच की मीटिंगें शहर के विकास की दिशा में सकारात्मक कदम हैं। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या इन बैठकों के जरिए प्रस्तावित योजनाएं और सुझाव अमल में लाए जा सकेंगे और चंडीगढ़ के विकास में क्या वास्तविक परिवर्तन आएगा।