भाजपा ने 2026 के पंचायत चुनाव और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के तहत 98 में से 70 जिलों में अपने जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की है। इन नियुक्तियों में भाजपा ने पहले चरण में अधिकतर अगड़ी जातियों पर जोर दिया है। पार्टी की यह रणनीति स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि वह अगड़ी जातियों के समर्थन को प्राथमिकता दे रही है। 2023 में भाजपा ने चार महिला और चार अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग के जिलाध्यक्ष बनाए थे, लेकिन आने वाले चुनावों के मद्देनजर इनके संख्या को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का सुझाव केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिया गया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर सर्वसम्मति न बनने के कारण इस पर पूरी तरह से अमल नहीं हो पाया, लेकिन पहले चरण में महिलाओं की संख्या को चार से बढ़ाकर पांच और एससी वर्ग की संख्या को चार से बढ़ाकर छह किया गया है।
भाजपा ने अपने जिलाध्यक्षों की लिस्ट में एक भी मुस्लिम नेता को जगह नहीं दी है। सामान्य वर्ग के अंतर्गत 20 ब्राह्मण, 10 ठाकुर, 3 कायस्थ, 2 भूमिहार, 4 वैश्य और 1 पंजाबी अध्यक्ष शामिल हैं। इसके साथ ही ओबीसी वर्ग से 25 जिलाध्यक्ष बनाए गए हैं, जिसमें यादव, बढ़ई, कश्यप, कुशवाहा, पाल, राजभर, रस्तोगी, सैनी जैसे विभिन्न जातियों के प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित किया गया है। वहीं, अनुसूचित जाति से भी कुल छह जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं, जिसमें अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की इस जातीय समीकरण की रणनीति सपा जैसे विपक्षी दलों द्वारा उनके सवर्ण वोट बैंक में सेंधमारी को रोकने का प्रयास है।
ऐसे नए जिलाध्यक्षों का पद लेना आसान नहीं है; उन्हें पंचायत चुनाव में पार्टी के लिए जीत सुनिश्चित करनी है, साथ ही विधानसभा चुनाव की तैयारी भी करनी है। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय ने जिलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर आंतरिक सत्ता संघर्ष की बात की, जिसमें हर कार्यकर्ता इस पद की चाहत रखता है। भाजपा यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि अगड़ी जातियों के साथ-साथ पिछड़ी जातियों और दलितों का भी उनके लिए महत्व है, इसलिए जातीय समीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
स्थानीय स्तर पर कई जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर मंत्री और सांसदों की ओर से बड़ी पैरवी हुई है। मऊ, शाहजहांपुर और बाराबंकी जैसे जिलों में स्थानीय विधायकों की पदाधिकारी की सलाह ने जिलाध्यक्षों की नियुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हालांकि, रायबरेली में पांच पूर्व जिलाध्यक्षों ने मौजूदा जिलाध्यक्ष के खिलाफ विरोध प्रकट किया, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनके अनुरोध को नजरअंदाज किया।
भाजपा में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के साथ-साथ प्रदेश अध्यक्ष पद का चुनाव भी नजदीक है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव मार्च में होना है और इस चुनाव के लिए पूर्व में चर्चा की गई जातीय समीकरण के अनुसार दावेदारों की तैयारी अब तेज हो गई है। कुल मिलाकर, भाजपा की यह नियुक्ति प्रक्रिया चयनित जिलाध्यक्षों और आगामी चुनावों की राजनीति को प्रभावित करने का एक महत्वपूर्ण असर डाल सकती है।