खराब अनाज भेजने के मामले में मानव अधिकार आयोग ने जिम्मेदार अधिकारियों से मांगा जवाब
जबलपुर, 19 मई (हि.स.)। गत दिनों जबलपुर से टीकमगढ़ सप्लाई किये गये 25 हजार क्विंटल चावल के रैक के खराब निकलने का मामला प्रकाश में आया है। वहाँ के राशन की दुकानों से राशन लेने वाले हितग्राहियों को मिलने वाले 378 राशन की दुकानो से 3 माह तक हितग्राहियों को बाटने के लिये जबलपुर से जो 25 हजार क्विंटल चावल भेजा गया था वह 90 फीसदी गुणवत्ताहीन पाया गया है, जो इंसानों के खाने लायक नहीं बल्कि कैटल फीड रहा और जानवरों को खिलाने के काम में आता हैं।
खराब चावल का हल्ला मचने से तूल पकड़ते देख वहां हितग्राहियों को देने योग्य नहीं पाये जाने से उन्हें नहीं दिया गया और सेग्रीगेशन की प्रक्रिया अपनाई गई। इस कारण वहां राशन नहीं मिलने से राशन लेने वाले हितग्राहियों को कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
मप्र मानव अधिकार आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय प्रभारी ने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार के आधार पर जनहित में मामले को संज्ञान में लेकर मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग की मुख्यपीठ भोपाल में प्रकरण पर सुनवाई करते हुए, सदस्य राजीव कुमार टण्डन की एकलपीठ ने मानव अधिकारों के हनन का मामला मानकर, टीकमगढ़ के कलेक्टर से मामले की जांच कराकर, की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह में तलब किया है।
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