बहराइच के गाजी मियां की दरगाह पर इस वर्ष जेठ मेला आयोजित नहीं किया जा रहा है। यह 500 वर्षों में केवल दूसरी बार हो रहा है। सामान्यत: यह मेला 15 मई से 15 जून तक चलता है, लेकिन हाल के विवादों और पहलगाम हमलों के चलते प्रशासन ने ऐसा निर्णय लिया है। दरगाह कमेटी ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की, परंतु अनुमति नहीं मिल पाई। अब, 19 मई को लखनऊ बेंच इस मुद्दे पर फिर से सुनवाई करेगी। यहां के विक्रेताओं के लिए मेले का आयोजन एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर होता है, लेकिन इस बार वे निराश महसूस कर रहे हैं। उनके अनुसार, यदि मेला आयोजित होता, तो उन्हें अच्छा लाभ मिलता।
दरगाह के आसपास की स्थिति को समझने के लिए दैनिक भास्कर की टीम ने बहराइच का दौरा किया और वहां के व्यापारियों और आगंतुकों से बातचीत की। इस साल न होने वाले मेले से सभी प्रभावित हैं। गत वर्ष मेले में लगभग 15 लाख लोग शामिल हुए थे, जहां शनिवार, रविवार और सोमवार को अधिक भीड़ देखी जाती थी। वहीं, 2020 में कोरोना महामारी के दौरान दरगाह कमेटी ने अपने ही निर्णय से मेला नहीं लगाया था। इस बार, प्रशासन ने कहा कि कानून व्यवस्था को देखते हुए मेला नहीं लगाया जाएगा।
कई स्थानीय व्यवसायियों ने बताया कि मेले से उन्हें झंझटों के समाधान में मदद मिलती थी। जैसे बहराइच के आमिर कहते हैं, “हम यहां किसी समस्या का समाधान खोजने आते हैं।” तुफैल नामक एक किसान ने भी बताया कि वे साल में कई बार दरगाह आते हैं और मेले का न होना उनके लिए बड़ी निराशा का कारण है। उनके अनुसार, मेले में हर धर्म के लोग आते हैं, जो अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां आते हैं।
स्थानीय दुकानदारों की भी इस बारे में गंभीर चिंताएं हैं। चूड़ी बेचनें वाले शहबान ने बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से यह व्यवसाय कर रहे हैं। मेले के बिना, उनके व्यापार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। एक किसान अब्दुल्ला ने कहा कि इस मेला के न होने से 90% लोगों का रोजगार चला गया है, जबकि चप्पल-दरजीन वाले दुकानदार अब्दुल वाहिद ने भी यही बात दोहराई। उनका कहना था कि मेले में लाखों लोगों का रोजगार जुड़ा होता है, जिसमें कृषि से जुड़े छोटे व्यवसायी भी शामिल हैं।
दरगाह मेला कमेटी ने स्पष्ट किया कि मेले की स्थिति में दरगाह के आसपास इकट्ठा होने वाले दुकानदारों की संख्या बढ़कर 1,000 तक पहुंच जाती है और इस दौरान यहां 15 लाख लोग आते हैं। मेला ना लगने पर, इसके ना सिर्फ स्थानीय लोगों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ेगा। पूर्व मंत्री यासर शाह ने कहा कि मेले से स्थानीय व्यापार में 400-500 करोड़ रूपये का कारोबार होता है, जिसमें कई लोग अपनी सूझ-बूझ और मेहनत से अपनी रोजी-रोटी कमा लेते हैं।
गाजी मियां की दरगाह का ऐतिहासिक महत्व भी बहुत अधिक है। माना जाता है कि सैयद सालार मसूद गाजी ने भारत में कई इतिहासकारों के अनुसार महत्वपूर्ण युद्ध किए थे और उनकी कब्र बहराइच में स्थित है। अब, जब वे श्रद्धालु इस दरगाह पर पहुँचते हैं, तो उनकी भक्ति के प्रतीक के रूप में मेले का आयोजन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इस बार मेला न लगने के कारण सभी की आस्था प्रभावित हुई है, और स्थानीय बाजार, जो कि इस मेले पर निर्भर है, नुकसान झेल रहा है।