भोपाल, 20 नवंबर । सहकारिता क्षेत्र की कार्यप्रणाली को सुदृढ़ बनाने और इसे आधुनिक तकनीकी ढांचे से जोड़ने की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के बीच 72वाँ अखिल भारतीय सहकारी सप्ताह अपने अंतिम चरण में पहुँच गया है। सप्ताह का राज्य स्तरीय समापन समारोह आज यानी 20 नवंबर को आयोजित किया जा रहा है, जिसमें प्रदेश के सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।
उल्लेखनीय है कि उक्त आयोजित कार्यक्रम में पूरे सप्ताह चलने वाली गतिविधियों का सार प्रस्तुत किया जाएगा। साथ ही ये आगामी अंतरराष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 को ध्यान में रखते हुए सहकारिता आंदोलन को नई दिशा देने पर भी केंद्रित रहेगा। इस वर्ष सहकारी सप्ताह का प्रमुख विषय “परिचालन दक्षता, जवाबदेही और पारदर्शिता के लिये डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना” निर्धारित किया गया है। सहकारिता क्षेत्र में तेजी से बढ़ते डिजिटल परिवर्तन और उसकी आवश्यकताओं को देखते हुए यह विषय अत्यंत प्रासंगिक माना जा रहा है। समारोह में सहकारी संस्थाओं की कार्यशैली में डिजिटल साधनों के उपयोग, ई-गवर्नेंस प्रणाली, वित्तीय पारदर्शिता और सदस्यों तक सेवाओं को आसानी से पहुँचाने के लिए नए तकनीकी ढाँचों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक मनोज गुप्ता ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि समापन समारोह राजधानी भोपाल के समन्वय भवन, अपेक्स बैंक परिसर में सुबह 10 बजे से आरंभ होगा। आयोजन में मध्यप्रदेश भर की प्रादेशिक सहकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, विभिन्न जिलों के सहकारी बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी, प्रबंधक और सहकारिता क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ बड़ी संख्या में भाग लेंगे। उन्होंने बताया कि सप्ताह के दौरान सहकारी समितियों में क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण, वित्तीय प्रबंधन और सदस्य सशक्तिकरण जैसे विषयों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। समापन समारोह में इन सभी गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया जाएगा और भविष्य की रणनीतियों पर विचार-विमर्श होगा।
कार्यक्रम के दौरान सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग सहकारी संस्थाओं के डिजिटलीकरण मॉडल, पारदर्शिता बढ़ाने के उपाय और सहकारी ढांचे को फिर से मजबूत बनाने के लिए सरकार की आगामी योजनाओं पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि मंत्री इस अवसर पर सहकारी बैंकों में डिजिटल बैंकिंग विस्तार, आधुनिक सॉफ्टवेयर प्रणाली और ग्रामीण सहकारी समितियों के तकनीकी उन्नयन को लेकर नई पहल या घोषणाएँ भी कर सकते हैं। राज्य में सहकारी संस्थाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। कृषि, स्वयं-सहायता समूह, डेयरी और क्रेडिट सहकारिताओं को मजबूत करने में डिजिटलीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इसी दिशा में इस समारोह को राज्य सरकार और सहकारिता विभाग अत्यंत महत्वपूर्ण मान रहे हैं।