पूर्वी सिंहभूम, 28 अप्रैल । जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने टाटानगर और आसपास के रेल मार्गों पर ट्रेनों की लगातार लेटलतीफी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को और व्यापक बनाने की रणनीति तेज कर दी है। उन्होंने इस जनसमस्या को राजनीतिक सीमाओं से ऊपर उठाकर सभी दलों का समर्थन जुटाने की पहल शुरू की है।
मंगलवार को विधायक सरयू राय ने बताया कि इस मुद्दे पर उन्होंने विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू से बातचीत की है। उन्होंने दोनों नेताओं से आंदोलन में सक्रिय भागीदारी का आग्रह किया है। साथ ही, मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) को सौंपे गए ज्ञापन की प्रति भी उन्हें भेजी गई है, ताकि इस जनमुद्दे पर व्यापक समर्थन तैयार किया जा सके।
सरयू राय ने कहा कि ट्रेनों की देरी अब आम जनता की गंभीर समस्या बन चुकी है। इससे नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि समय पर ट्रेन नहीं चलने से लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है और यात्रियों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने चक्रधरपुर रेल मंडल के अधिकारियों पर आरोप लगाया कि वे वास्तविक स्थिति को छिपाने के लिए समय की पाबंदी (पंक्चुअलिटी) के भ्रामक आंकड़े पेश कर रहे हैं। सीनियर डीसीएम द्वारा 65 से 70 प्रतिशत समयपालन का दावा किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया कि यह आंकड़ा किन ट्रेनों और किस अवधि के आधार पर तैयार किया गया है।
विधायक ने विशेष रूप से चांडिल, कांड्रा और राखा माइंस से टाटानगर के बीच ट्रेनों के घंटों विलंब का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह सामान्य परिचालन समस्या नहीं, बल्कि व्यवस्थागत खामी का स्पष्ट संकेत है। उनके अनुसार, यात्री ट्रेनों को रोककर मालगाड़ियों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है।
सरयू राय ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के बयान का हवाला देते हुए कहा कि बढ़ते औद्योगिक परिवहन के दबाव को संतुलित करने के लिए रेल बुनियादी ढांचे का विस्तार आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल दावों से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस कार्यवाही की जरूरत है।
उन्होंने टाटानगर क्षेत्र में रेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी पर भी चिंता जताई और आदित्यपुर से सलगाजुड़ी तक तीसरी रेल लाइन बिछाने की मांग दोहराई। राय ने कहा कि घाटशिला से बहरागोड़ा और सरायकेला से आदित्यपुर तक इस आंदोलन को फैलाया जाएगा, ताकि यह पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवाज बन सके और रेलवे प्रशासन पर प्रभावी दबाव बनाया जा सके।