हरिद्वार, 26 अप्रैल । हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में रविवार को प्रेस क्लब हरिद्वार सभागार में भव्य द्विशताब्दी समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का विषय आर्थिक उदारीकरण बनाम बाजारीकरण के दौर में पत्रकारिता रखा गया, जिसमें बदलते मीडिया परिदृश्य, पत्रकारिता के मूल्यों और डिजिटल युग की चुनौतियों पर गहन चर्चा हुई।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विशिष्ट अतिथि आचार्य बालकृष्ण और मुख्य वक्ता प्रियंका शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। समारोह में बड़ी संख्या में पत्रकार, बुद्धिजीवी और मीडिया से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
अपने संबोधन में डॉ. निशंक ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए कहा कि 200 वर्षों की यह यात्रा संघर्ष, समर्पण और जनसेवा की मिसाल है। उन्होंने कहा कि हिंदी आज विश्व की प्रभावशाली भाषाओं में शामिल है और हिंदी अखबारों के पाठकों की संख्या आज भी सबसे अधिक है। अपने शुरुआती पत्रकारिता अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने ‘सीमांत वार्ता’ नाम से दैनिक अखबार की शुरुआत कर कड़ी मेहनत से पत्रकारिता को आगे बढ़ाया।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर हिंदी का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है और दुनिया के करीब 250 विश्वविद्यालयों में हिंदी का अध्ययन कराया जा रहा है। उनके अनुसार, पत्रकारिता केवल सूचना का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने का सशक्त उपकरण है।
विशिष्ट अतिथि आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य को सामने लाना और समाज को सही दिशा देना है। उन्होंने जोर दिया कि वर्तमान समय में पत्रकारों को निष्पक्षता और जनहित को प्राथमिकता देते हुए अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
मुख्य वक्ता प्रियंका शर्मा ने आधुनिक पत्रकारिता की चुनौतियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर कई सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने कहा कि डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव ने खबरों के स्वरूप को पूरी तरह बदल दिया है। जहां सोशल मीडिया ने आम लोगों को अपनी बात रखने का मंच दिया है, वहीं फेक न्यूज और भ्रामक सूचनाओं की समस्या भी बढ़ी है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सोशल मीडिया ने उनकी पहचान को व्यापक बनाया और आज के दौर में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
प्रेस क्लब हरिद्वार के अध्यक्ष धर्मेंद्र चौधरी ने कहा कि यह अवसर केवल उत्सव का नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों को बदलते समय के साथ खुद को ढालते हुए सत्य, निष्पक्षता और जनहित जैसे मूल सिद्धांतों को बनाए रखना होगा।
कार्यक्रम में आर्थिक उदारीकरण और बाजारीकरण के प्रभावों पर भी चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि उदारीकरण के बाद मीडिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है, जिससे गुणवत्ता और गति में सुधार हुआ है, लेकिन बाजारीकरण के कारण पत्रकारिता के मूल्यों पर असर पड़ा है। विज्ञापन और टीआरपी की होड़ में कई बार खबरों की प्राथमिकता बदल जाना चिंता का विषय है।
इससे पूर्व अतिथियों का फूल माला पहनाकर और स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया गया। इस अवसर पर अनेक पत्रकार मौजूद रहे।