कोरबा, 27 जुलाई (हि. स.)। करतला विकासखंड के ग्राम नवापारा में स्थापित महामाया बहुउद्देशीय सहकारी समिति मर्यादित (महामाया एफपीओ) आज जिले में किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) की सफलता का एक मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है। कभी महज 7.09 लाख रुपये के कारोबार से शुरुआत करने वाला यह संगठन आज 1.96 करोड़ रुपये के वार्षिक कारोबार तक पहुंच चुका है। इस उपलब्धि ने न केवल सैकड़ों किसानों की आर्थिक स्थिति बदली है, बल्कि सामूहिक खेती, मूल्य संवर्धन और आधुनिक कृषि तकनीकों के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दी है।
वर्ष 2015-16 में नाबार्ड के सहयोग और सहकारिता विभाग के मार्गदर्शन में शुरू हुए इस एफपीओ से वर्तमान में 882 किसान जुड़े हुए हैं। संगठन ने किसानों को सामूहिक विपणन का मंच उपलब्ध कराया, जिससे उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने लगा। पहले स्थानीय व्यापारियों पर निर्भर रहने वाले किसान अब सीधे बेहतर बाजारों तक पहुंच बना रहे हैं, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
महामाया एफपीओ ने कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन पर भी विशेष ध्यान दिया है। संगठन द्वारा काजू प्रसंस्करण, कोल्ड प्रेस्ड ऑयल, आम एवं जामुन पल्प जैसी प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की गई है। इसके चलते किसानों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिले हैं और स्थानीयस्तर पर रोजगार का भी सृजन हुआ है।
एफपीओ के कृषि इनपुट सेंटर से किसानों को खाद, बीज और कीटनाशक बाजार की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। साथ ही आधुनिक कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती पर नियमित प्रशिक्षण दिए जाने से खेती की लागत घटी है और उत्पादन क्षमता में भी सुधार आया है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में भी संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 200 से अधिक महिलाओं को रोजगार और आय का साधन मिला है। संगठन के अनुसार, इससे जुड़े किसानों की वार्षिक आय में औसतन 50 हजार रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
वर्तमान में एफपीओ आम, काजू, मूंगफली, जामुन, ब्लैक राइस, नींबू, तिल और सरसों सहित कई कृषि उत्पादों का संग्रहण एवं विपणन कर रहा है। शासन के सहयोग से यहां प्रतिदिन 500 किलोग्राम क्षमता वाली आधुनिक काजू प्रसंस्करण इकाई तथा पांच टन क्षमता का डीप फ्रीजर भी विकसित किया जा रहा है। इससे उत्पादों का सुरक्षित भंडारण और वर्षभर बेहतर विपणन संभव हो सकेगा।
महामाया एफपीओ की यह यात्रा बताती है कि यदि किसान संगठित होकर आधुनिक तकनीक, सहकारिता और मूल्य संवर्धन को अपनाएं, तो खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। यही कारण है कि यह संगठन आज कोरबा ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य किसान उत्पादक संगठनों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर सामने आया है।