सिख पंथ ने राष्ट्र, धर्म और मानवता की रक्षा के लिए दिए सर्वोच्च बलिदान : डॉ. सिकंदर कुमार

शिमला, 11 जुलाई । भाजपा के प्रदेश महामंत्री एवं राज्यसभा सांसद डॉ. सिकंदर कुमार ने शनिवार को मिडिल बाजार स्थित गुरुद्वारा श्री भगत नामदेव जी में आयोजित महान गुरमत समागम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने संगत को संबोधित करते हुए कहा कि सिख पंथ ने केवल अपने धर्म की ही नहीं, बल्कि पूरे भारत की संस्कृति, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवता की रक्षा के लिए अतुलनीय बलिदान दिए हैं, जिन्हें देश सदैव श्रद्धा के साथ स्मरण करेगा।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और इसीलिए उन्हें “हिंद दी चादर” कहा जाता है। उन्होंने कहा कि यह बलिदान केवल एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतीय के धार्मिक अधिकारों और मानव गरिमा की रक्षा के लिए था।

उन्होंने चार साहिबज़ादों के अद्वितीय बलिदान का उल्लेख करते हुए कहा कि बड़े साहिबज़ादे बाबा अजीत सिंह जी और बाबा जुझार सिंह जी ने चमकौर साहिब के युद्ध में वीरतापूर्वक लड़ते हुए शहादत प्राप्त की, जबकि छोटे साहिबज़ादे बाबा ज़ोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी ने मात्र नौ और छह वर्ष की आयु में अपने धर्म से समझौता करने से इनकार किया और सरहिंद में जीवित दीवार में चिनवा दिए गए, लेकिन अपने सिद्धांतों से विचलित नहीं हुए। उनका बलिदान साहस, आस्था और राष्ट्रभक्ति का अमर प्रतीक है।

डॉ. सिकंदर कुमार ने कहा कि सिख इतिहास केवल शौर्य और बलिदान का इतिहास नहीं, बल्कि सेवा, समानता और राष्ट्रभक्ति का भी इतिहास है। उन्होंने बाबा बंदा सिंह बहादुर का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष कर समाज के कमजोर वर्गों को न्याय और सम्मान दिलाने का कार्य किया तथा सिख परंपरा ने सदैव राष्ट्र और मानवता की रक्षा के लिए अग्रणी भूमिका निभाई।

इस अवसर पर डॉ. सिकंदर कुमार ने श्रद्धालुओं की सुविधा और गुरुद्वारा परिसर में ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मिडिल बाजार गुरुद्वारा के लिए सोलर लाइट उपलब्ध कराने की घोषणा भी की। उन्होंने कहा कि यह छोटा-सा योगदान श्रद्धालुओं की सेवा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक सार्थक प्रयास होगा।

उन्होंने संगत से गुरु साहिब की शिक्षाओं—सेवा, समर्पण, समानता, मानवता और “सरबत दा भला”—को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि हम गुरु साहिब के आदर्शों पर चलें तो एक सशक्त, समरस और विकसित भारत का निर्माण संभव है।

कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में संगत ने गुरबाणी कीर्तन का श्रवण किया और गुरु का लंगर ग्रहण किया।