हरिद्वार, 18 जुलाई ।पतंजलि के वैज्ञानिकों ने महर्षि च्यवन से जुड़ी प्राचीन कथा को आधुनिक विज्ञान से सिद्ध कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पतंजलि स्पेशल च्यवनप्राश पर किया गया शोध दुनिया के प्रतिष्ठित रिसर्च जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
शोध के अनुसार पतंजलि च्यवनप्राश तनाव की स्थिति में कोशिकाओं की रक्षा करता है, मांसपेशियों की कार्यक्षमता को बनाए रखता है और शरीर को दीर्घायु प्रदान करने में मदद करता है। इस अध्ययन में सी.इलैगंस मॉडल जीव का उपयोग किया गया, जिसकी जैविक प्रक्रियाएं मनुष्यों से मिलती-जुलती हैं।
पतंजलि के प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने बताया कि च्यवनप्राश के नियमित सेवन से जीवों में हीट स्ट्रेस से होने वाली कोशिकीय क्षति में कमी आई। इससे जीवनकाल बढ़ा, भोजन ग्रहण क्षमता में सुधार हुआ और मांसपेशियों की गतिशीलता बेहतर हुई। शोध में पुष्टि हुई कि च्यवनप्राश में शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण हैं जो कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाते हैं और शरीर की प्राकृतिक सुरक्षा बढ़ाते हैं।
पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि प्राचीन काल में महर्षि च्यवन के लिए तैयार “रसायन” ही आज का च्यवनप्राश है। सदियों से लोग इसे रोग प्रतिरोधक क्षमता और संपूर्ण स्वास्थ्य का आधार मानते आए हैं। यह शोध साबित करता है कि आयुर्वेद केवल परंपरा नहीं, बल्कि आधुनिक स्वास्थ्य समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान भी है।