नई दिल्ली, 20 अगस्त । पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बनने लगा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमत ने रफ्तार पकड़ ली है। ब्रेंट क्रूड की कीमत आज उछल कर 94 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से ऊपर चली गई। इसी तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड भी आज 87 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया।
आज ब्रेंट क्रूड ने 91.49 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से कारोबार की शुरुआत की। ट्रेडिंग शुरू होते ही इसकी कीमत में तेजी का रुख बन गया। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार मे ब्रेंट क्रूड उछल कर 94.63 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसके भाव में मामूली गिरावट भी दर्ज की गई। भारतीय समय के मुताबिक शाम 6:45 बजे ब्रेंट क्रूड 2.07 डॉलर प्रति बैरल यानी 2.26 प्रतिशत की तेजी के साथ 93.69 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
ब्रेंट क्रूड की तरह वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) क्रूड की ट्रेडिंग आज 84.28 डॉलर प्रति बैरल के स्तर से शुरू हुई। शुरुआत में कुछ देर तक डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमत स्थिर बनी रही लेकिन कुछ देर बाद ही इसकी कीमत में तेजी आने लगी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग बढ़ने और सप्लाई घटने की आशंका के कारण डब्ल्यूटीआई क्रूड उछल कर 87.61 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया। इसके बाद इसके भाव में थोड़ी कमजोरी भी आई। भारतीय समय के मुताबिक शाम 6:45 बजे डब्ल्यूटीआई क्रूड 86.70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
जानकारों का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह से ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का संकेत दिया है उससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका बन गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका ऐसे सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगाएगा, जो अभी तक किसी भी देश के खिलाफ नहीं लगाए गए हैं। ट्रंप ने ईरान की मदद करने वाले देशों को भी बुरा परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स एलएलपी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल भंसाली का कहना है कि डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रवैये की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में एक बार फिर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बन गई है। तनाव बढ़ाने की इसी आशंका की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आज लगातार चौथे दिन कच्चे तेल की कीमत में तेजी का रुख बना रहा।
अनिल भंसाली का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में आई तेजी भारत के लिए चिंता बढ़ाने वाली खबर है। भारत अपनी जरूरत का करीब 86 प्रतिशत कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदता है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी जारी रहती है तो भारत का इंपोर्ट बिल भी बढ़ जाएगा।
इंपोर्ट बिल बढ़ने का प्रत्यक्ष असर देश के व्यापार घाटा पर भी पड़ेगा। इसका एक असर डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पर भी पड़ सकता है। पिछले कुछ समय से रुपये की कीमत में अधिक उतार-चढ़ाव नहीं हो रहा है लेकिन अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रही तो इससे डॉलर की मांग में इजाफा हो सकता है। ऐसा होने पर स्वाभाविक रूप से रुपये की कीमत पर दबाव बढ़ सकता है।
अप्रैल 2026 से लेकर जुलाई 2026 के बीच भारत का क्रूड इंपोर्ट बिल 63.4 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 56.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्शाता है। अनिल भंसाली के अनुसार चिंता की बात यह है कि क्रूड इंपोर्ट बिल में जरूर बढ़ोतरी हुई है लेकिन क्रूड इंपोर्ट वॉल्यूम में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है।
भंसाली के अनुसार पिछले साल इसी अवधि में जितना कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदा गया था, लगभग उतना ही कच्चा तेल इस साल भी अंतरराष्ट्रीय बाजार से खरीदा गया है। वॉल्यूम में बढ़ोतरी नहीं होने के बावजूद कच्चे तेल की कीमत में बढ़ोतरी होने के कारण क्रूड इंपोर्ट बिल 56.5 प्रतिशत बढ़ गया है। माना जा रहा है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत पर लगाम नहीं लगा तो आने वाले दिनों में भारत में ऑयल मार्केटिंग कंपनियां पेट्रोल और डीजल की कीमत में बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर हो सकती हैं।