पिता-पुत्री ने एक साथ की एलएलबी, बेटी बनी यूनिवर्सिटी टॉपर तो पिता तीसरे स्थान पर

शिमला, 23 अगस्त । पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती और लक्ष्य साफ हो तो जिम्मेदारियों के बीच भी नई शुरुआत की जा सकती है। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के आलमपुर के रहने वाले पिता-पुत्री ने इस बात को अपनी मेहनत से साबित किया है। दोनों ने एक साथ हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) से तीन वर्षीय एलएलबी की पढ़ाई पूरी की और विश्वविद्यालय की परीक्षा में शीर्ष स्थान हासिल कर परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया।

एचपीयू के धर्मशाला स्थित क्षेत्रीय केंद्र में वर्ष 2023 से जून 2026 तक एलएलबी की पढ़ाई करने वाली 23 वर्षीय अंशिका राणा ने विश्वविद्यालय में पहला स्थान हासिल किया है। उनके पिता प्रवीण राणा ने इसी पाठ्यक्रम में तीसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों ने एक ही समय में कानून की पढ़ाई की। अंशिका नियमित छात्रा थीं, जबकि प्रवीण ने पत्राचार माध्यम से एलएलबी पूरी की।

विश्वविद्यालय की ओर से हाल ही में एलएलबी के छठे और अंतिम सेमेस्टर का परिणाम घोषित किया गया। अंतिम परिणाम सामने आने के बाद दोनों की मेहनत का यह खास नतीजा सामने आया।

अंशिका ने पूरे विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल किया, वहीं उनके पिता प्रवीण राणा तीसरे स्थान पर रहे। पिता और बेटी का एक ही पाठ्यक्रम में इस तरह शीर्ष स्थानों पर पहुंचना परिवार के साथ क्षेत्र के लोगों के लिए भी खुशी का विषय है।

प्रवीण राणा हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रशिक्षण केंद्र, दरोह में इंस्पेक्टर के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने 50 वर्ष की उम्र पार करने के बाद अपनी पढ़ाई फिर शुरू करने का फैसला किया। पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों के बीच कानून की पढ़ाई जारी रखना उनके लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई के लिए नियमित समय निकाला और तीन साल के पाठ्यक्रम को पूरा किया।

पढ़ाई के इस सफर में पिता और बेटी ने एक-दूसरे का हौसला बढ़ाया। दोनों साथ कक्षाओं में जाते थे और पढ़ाई से जुड़ी तैयारियों में एक-दूसरे को प्रोत्साहित करते रहे।

परीक्षा और परिणाम के दौरान भी दोनों ने एक-दूसरे की उपलब्धियों को साझा किया। इस अनुभव ने उनके पारिवारिक रिश्ते को एक अलग यादगार अनुभव दिया।

अंशिका ने कहा कि पिता के साथ पढ़ाई करना उनके लिए यादगार अनुभव रहा। दोनों ने पाठ्यक्रम के दौरान एक-दूसरे को प्रेरित किया और एक-दूसरे की उपलब्धियों पर खुशी जताई। प्रवीण के लिए 50 वर्ष की उम्र के बाद एलएलबी करना एक चुनौती थी, लेकिन उन्होंने इसे पूरा करने का संकल्प बनाए रखा। नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ उन्होंने पढ़ाई के लिए समय निकाला और परीक्षा की तैयारी की।

प्रवीण ने अपनी सफलता पर कहा कि उम्र शिक्षा के रास्ते में रुकावट नहीं बननी चाहिए। उनके अनुसार अगर किसी व्यक्ति में सीखने की इच्छा और स्पष्ट लक्ष्य हो तो जीवन के किसी भी पड़ाव पर नई शुरुआत की जा सकती है।