सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा : हाई कोर्ट ने जेएसएससी की नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर उठाए सवाल, मांगा जवाब

रांची, 04 अगस्त । झारखंड उच्च न्यायालय ने सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा (विज्ञापन संख्या-13/2023) में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आयोग से विस्तृत जवाब तलब किया है।

मंगलवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में गिरिधर प्रसाद एवं अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि समान परिस्थितियों में परीक्षा देने वाले तथा समान रॉ अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों के नॉर्मलाइज्ड अंक अलग-अलग कैसे हो सकते हैं। अदालत ने यह भी जानना चाहा कि अलग-अलग रॉ अंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों का अंतिम नॉर्मलाइज्ड स्कोर समान किस आधार पर निर्धारित किया गया।

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि आयोग द्वारा अपनाई गई नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतरती। उदाहरण देते हुए बताया गया कि एक ही शिफ्ट में परीक्षा देने वाले दो अभ्यर्थियों के रॉ अंक 69-69 होने के बावजूद एक अभ्यर्थी का नॉर्मलाइज्ड स्कोर 17 और दूसरे का 34 दर्शाया गया। इस पर अदालत ने आयोग से पूछा कि समान परिस्थितियों और समान रॉ अंक होने के बावजूद दोनों अभ्यर्थियों के परिणामों में इतना अंतर किस आधार पर किया गया।

न्यायालय ने यह भी पूछा कि यदि विभिन्न अभ्यर्थियों के रॉ अंक अलग-अलग हैं, तो क्या नॉर्मलाइजेशन के बाद उनका अंतिम स्कोर समान हो सकता है। इन दोनों बिंदुओं पर अदालत ने जेएसएससी को शपथ-पत्र के माध्यम से विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

मामले की अगली सुनवाई छह अगस्त को होगी।

याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार, अधिवक्ता अमृतांश वत्स, अधिवक्ता शुभम मिश्रा, अधिवक्ता प्रेम पुजारी राय सहित अन्य ने पक्ष रखा। वहीं, जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष प्रस्तुत किया।

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