पीएलवी को दिया गया क्षमता संवर्धन प्रशिक्षण, जरूरतमंदों तक कानूनी सहायता पहुंचाने पर जोर

खूंटी , 28 अगस्त । जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से शुक्रवार को पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) के लिए क्षमता संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

यह कार्यक्रम झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची के निर्देश पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकार, खूंटी रसिकेस कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अधीन कार्यरत कुल 33 पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने भाग लिया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव, मुख्य विधिक सहायता रक्षा परामर्शी राजीव कमल सहित पैनल के सदस्य उपस्थित थे।

कार्यक्रम के दौरान प्रत्येक पीएलवी से आमने-सामने संवाद कर उनके दैनिक कार्यों की समीक्षा की गई। साथ ही आम लोगों तक विधिक सेवाओं की बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने और पीएलवी की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। इस दौरान पीएलवी ने अपने कार्यक्षेत्र में आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों और अनुभवों को भी पैनल के समक्ष साझा किया।

पीएलवी को अपने-अपने विधिक सहायता क्लीनिक के माध्यम से नियमित रूप से विधिक जागरूकता शिविर आयोजित करने का निर्देश दिया गया। बताया गया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, खूंटी के अंतर्गत विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों में कुल 37 विधिक सहायता क्लीनिक संचालित हैं, जो ग्रामीण एवं जरूरतमंद लोगों तक कानूनी सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रशिक्षण के दौरान कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध और प्रतितोष) अधिनियम, 2013 यानी पॉश एक्ट पर विस्तार से चर्चा की गई। आंतरिक शिकायत समिति के गठन, लैंगिक उत्पीड़न की परिभाषा और पीड़ित महिलाओं को उपलब्ध कानूनी सहायता की जानकारी दी गई।

इसके अलावा मानव-वन्यजीव संघर्ष से पीड़ितों को विधिक सहायता, नशा पीड़ितों के लिए कानूनी सेवाएं एवं नशा उन्मूलन, मानसिक रूप से बीमार और बौद्धिक दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार, बच्चों के लिए बाल-मित्रवत विधिक सेवाएं तथा सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मिलने वाली कानूनी सहायता से संबंधित नालसा की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी गई।

पीएलवी को निर्देश दिया गया कि वे इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार कर पात्र और जरूरतमंद लोगों तक इनका लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करें। सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मोटर वाहन दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) के समक्ष दावा प्रस्तुत करने, अंतरिम मुआवजा दिलाने और तत्काल कानूनी परामर्श उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर भी प्रकाश डाला गया।

जिला विधिक सेवा प्राधिकार, खूंटी ने आम लोगों से अपील की है कि विधिक सहायता अथवा इन योजनाओं से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए कार्यालय अवधि में टोल फ्री नंबर 15100, अपने नजदीकी विधिक सहायता क्लीनिक या पैरा लीगल वॉलंटियर से संपर्क कर दी जा सकती है।