जयपुर, 23 सितंबर । राजस्थान हाईकोर्ट ने जेडीए आयुक्त, जोन-7 के उपायुक्त और प्रवर्तन अधिकारी को नोटिस जारी कर पूछा है कि मालवीय नगर स्थित नूरानी मस्जिद व मदरसा तोडने से पूर्व याचिकाकर्ता को पक्ष रखने का मौका क्यों नहीं दिया गया। जस्टिस मनीष शर्मा की एकलपीठ ने यह आदेश राजस्थान मुस्लिम वक्फ बोर्ड की ओर से दायर याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता नकवी सेहबान नजीब ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता बोर्ड के स्वामित्व में मालवीय नगर के अशोक विहार में एक वक्फ संपत्ति है। जिसे नूरानी मस्जिद एवं मदरसा के नाम से जाना जाता है। इसका निर्माण साल 1981 में किया गया था और तब से यहां मुस्लिम समुदाय के नमाज सहित अन्य धार्मिक प्रयोजन होते आ रहे हैं। याचिकाकर्ता को गत 8 जून को पता चला कि जयपुर विकास प्राधिकरण ने इस मस्जिद व मदरसा को अल-सुबह ध्वस्त कर दिया है। याचिका में कहा गया कि याचिकाकर्ता को जेडीए की ओर से कार्रवाई करने से पूर्व कोई नोटिस नहीं दिया गया। जिससे उसे सुनवाई का मौका भी नहीं मिला। याचिका में कहा गया कि जेडीए की ओर से 5 जून को धारा 72 के तहत एक नोटिस जारी किया जाना बताया जा रहा है, लेकिन याचिकाकर्ता को यह नोटिस प्राप्त ही नहीं हुआ। इसके अलावा इस कथित नोटिस को भी शुक्रवार को जारी कर शनिवार को जवाब मांगा गया। यदि याचिकाकर्ता को यह मिलता तो भी वह शनिवार को अवकाश होने के चलते जवाब नहीं दे पाता। ऐसे में जेडीए की यह कार्रवाई गलत है। इसलिए जेडीए की इस कार्रवाई को अवैध घोषित किया जाए। जिस पर सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने जेडीए के संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।