नई दिल्ली/सहारनपुर, 8 सितंबर । उत्तर प्रदेश के सहारनपुर की कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के विध्वंस के बाद उत्पन्न स्थिति को लेकर जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद असद मदनी के निर्देश पर संगठन का उच्चस्तरीय केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को सहारनपुर पहुंचा। महासचिव मौलाना मुहम्मद हकीमुद्दीन कासमी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने मामले की कानूनी, प्रशासनिक और सामाजिक स्थिति का जायजा लिया।
प्रतिनिधिमंडल ने पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान, सांसद इमरान मसूद, भूमि से जुड़े पक्षों, अधिवक्ताओं तथा स्थानीय पदाधिकारियों से भी मुलाकात की।
बैठक में मस्जिद के विध्वंस, प्रशासन की कार्रवाई और उपलब्ध कानूनी विकल्पों पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने संबंधित राजस्व अभिलेखों, ऐतिहासिक दस्तावेजों और भूमि स्वामित्व से जुड़े दावों की भी समीक्षा की।
मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि मामले से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं, जिन्हें अध्यक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। विशेषज्ञों की सलाह के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। प्रभावित पक्ष को संवैधानिक अधिकारों और न्यायिक उपायों का अवसर दिए बिना कार्रवाई करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि जमीअत उलमा-ए-हिंद न्याय के लिए उच्च न्यायालय सहित सभी उपलब्ध कानूनी मंचों का सहारा लेगी और सहारनपुर के लोगों को आवश्यक कानूनी सहायता उपलब्ध कराएगी। साथ ही उन्होंने नागरिकों से शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखने की अपील की।