मैहर, 3 सितंबर । मध्य प्रदेश के मैहर जिले में जरियारी मार्ग पर बरगी नहर के किनारे नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण द्वारा निर्मित सेतु की साइडवाल में दरार आने से सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। सेतु के क्षतिग्रस्त होने की सूचना के बाद कलेक्टर विदिशा मुखर्जी ने मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सहित संबंधित विभागों के अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए स्थानीय नागरिकों से क्षतिग्रस्त सेतु वाले मार्ग का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की। उन्होंने लोगों से आवागमन के लिए परिवर्तित मार्ग अपनाने को कहा। साथ ही वैकल्पिक मार्ग पर आवश्यक रखरखाव और व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए।
कलेक्टर मुखर्जी ने गुरूवार को क्षतिग्रस्त सेतु वाले हिस्से में तत्काल बैरिकेडिंग कर मार्ग को बंद करने के निर्देश दिए। उन्होंने सेतु की तकनीकी स्थिति की जांच के लिए जांच समिति गठित करने को भी कहा। कलेक्टर ने बताया कि समिति की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद स्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
बरगी नहर परियोजना और इससे जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर स्थानीय स्तर पर पहले भी लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोप सामने आते रहे हैं। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार बुनियादी ढांचे के बारिश में क्षतिग्रस्त होने से निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय निवासियों और किसान संगठनों का आरोप है कि निर्माण कार्यों में लागत कम करने के प्रयास में कई बार सीमेंट, कंक्रीट और निर्धारित तकनीकी मानकों से समझौता किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश के दौरान पुल के हिस्सों में दरार आना गंभीर मामला है। नहर के आसपास बने निर्माण में किसी भी तरह की कमजोरी भविष्य में बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसी वजह से क्षतिग्रस्त सेतु पर तत्काल आवागमन रोकने के प्रशासन के फैसले को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बरगी नहर के बार-बार क्षतिग्रस्त होने से जहां सरकारी राशि के खर्च पर सवाल उठते हैं, वहीं नहर के आसपास रहने वाले किसानों की मुश्किलें भी बढ़ती हैं। नहर या उससे जुड़े निर्माण में क्षति होने पर खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने तथा यदि निर्माण में लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय कर कार्रवाई करने की मांग की है।