देहरादून, 13 सितंबर । शहरी विकास मंत्री राम सिंह कैड़ा ने यूआईआईडीबी को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस 7,000 बीघा जमीन का दावा कर जनता को गुमराह कर रही है। उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी को अब तक केवल 45 एकड़ भूमि उपलब्ध हुई है और 7,000 बीघा भूमि प्राप्त करने की कोई प्रक्रिया नहीं चल रही है।
मंत्री कैड़ा ने कहा कि कांग्रेस को पहले यह स्पष्ट करना चाहिए कि 7,000 बीघा भूमि कहां बेची गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने 7,000 बीघा भूमि यूआईआईडीबी को आवंटित नहीं की है। सरकारी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा और निवेश परियोजनाओं के लिए निर्धारित नियमों एवं शर्तों के तहत लीज मॉडल का इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लीज की अवधि 60 वर्ष है, 90 वर्ष नहीं।
मंत्री ने कहा कि यूआईआईडीबी का उद्देश्य अनुपयोगी सरकारी भूमि का नियोजित उपयोग करते हुए पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य और आईटी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना तथा रोजगार के अवसर बढ़ाना है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस प्रत्येक विकास कार्य में घोटाला तलाशकर भ्रम और भय का माहौल बनाने की राजनीति कर रही है।
उन्होंने कहा कि धामी सरकार राज्य के संसाधनों और जमीन की सुरक्षा के साथ युवाओं के भविष्य की जरूरतों को भी ध्यान में रख रही है। सरकार का लक्ष्य सरकारी संसाधनों का नियमानुसार बेहतर उपयोग कर प्रदेश में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाना है।
कैड़ा ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत और विकसित उत्तराखंड का लक्ष्य हासिल करने के लिए राज्य में पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा, वेलनेस और हॉस्पिटैलिटी सहित विभिन्न क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कांग्रेस से 7,000 बीघा के दावे की राजनीति छोड़कर 45 एकड़ के वास्तविक तथ्य पर बात करने को कहा।
उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो 7,000 बीघा भूमि यूआईआईडीबी को दी है और न ही इतनी भूमि लेने की कोई प्रक्रिया चल रही है। कांग्रेस को विकास का विरोध करने के बजाय इस पर अपना स्पष्ट दृष्टिकोण जनता के सामने रखना चाहिए।
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