नई दिल्ली, 23 अक्टूबर । दिल्ली के राऊज एवेन्यू कोर्ट ने भारत आकर उत्तर-पूर्व के जातीय समूहों को ट्रेनिंग देने के आरोपित छह यूक्रेनी नागरिकों को 24 फरवरी तक भारत से बाहर रहने की अनुमति दे दी है। स्पेशल जज प्रशांत शर्मा ने आरोपी अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइके को भी अमेरिका जाने की अनुमति दे दी।
सुनवाई के दौरान एनआईए की ओर से पेश वकील राहुल त्यागी ने कहा कि इस मामले की जांच आगे जारी है और वो जांच की प्रगति को लेकर सुनवाई की अगली तिथि को कोर्ट को बताएगा। इससे पहले 24 सितंबर को अदालत ने डाइके और छह यूक्रेनी नागरिकों को अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दे दी थी। एनआईए ने 8 सितंबर को मैथ्यू आरोन वैन डाइके के अलावा यूक्रेन के छह नागरिकों पेट्रो हुर्बा, टरस स्लिवियाक, इवान सुकमानोवस्की, मैरियन स्टेफानकीव, मास्कीम होंचारुक और विक्टर कामिंसिकी पर चार्जशीट दाखिल की थी। एनआईए ने इस मामले में यूएपीए के तहत एफआईआर दर्ज की थी, लेकिन चार्जशीट में यूएपीए की धाराएं नहीं लगाई गई हैं। एनआईए के मुताबिक वो इस मामले में पूरक चार्जशीट दाखिल करेगी।
इन विदेशी नागरिकों पर आरोप है कि वे म्यांमार में अवैध तरीके से घुसे और मिजोरम के संरक्षित इलाकों में प्रवेश कर जातीय समूहों से संपर्क कायम किया। इन पर अवैध हथियारों की आपूर्ति करने, जातीय समूहों को ट्रेनिंग देने और उन्हें ड्रोन चलाने में सहयोग करने का आरोप है। एनआईए के मुताबिक ये विदेशी वीजा पर भारत आए और फिर मिजोरम में प्रवेश किया, जो एक संरक्षित क्षेत्र है। इसके बाद वे म्यांमार में दाखिल हुए और जातीय युद्ध समूहों से संपर्क साधा। एनआईए के मुताबिक इन विदेशी नागरिकों को म्यांमार में प्रशिक्षण दिया गया था, जिसके बाद वे जातीय युद्ध समूहों को प्रशिक्षित कर रहे थे। ये समूह भारत में सक्रिय विद्रोही समूहों से जुड़े हुए हैं। यह आरोप भी लगाया गया है कि वे यूरोप से ड्रोन की एक बड़ी खेप लेकर आए थे।
