राजगढ़ः कलेक्टर-एसपी ने सिविल सेवा मार्गदर्शन कार्यक्रम में विद्यार्थियों से किया संवाद

राजगढ़, 04 नवंबर । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजगढ़ में आयोजित दो दिवसीय सिविल सेवा मार्गदर्शन कार्यक्रम में बुधवार को कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा और एसपी अमित तोलानी ने विद्यार्थियों से संवाद किया। इस दौरान अधिकारियों ने अपने संघर्ष और सफलता के अनुभव साझा किए।

कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. मिश्रा ने बताया कि पिता का निधन जल्दी होने के कारण परिवार की जिम्मेदारियां भी उनके सामने थीं। उन्होंने बिना कोचिंग किताबों से पढ़ाई की और वरिष्ठ अधिकारियों से पुस्तकें लेकर तैयारी जारी रखी। एक साक्षात्कार में 90 अंक मिलने के बावजूद चयन नहीं हुआ, लेकिन उन्होंने प्रयास नहीं छोड़े। एमपीपीएससी, बिहार पीएससी और यूपीपीएससी सहित विभिन्न परीक्षाओं में शामिल हुए। ऑल इंडिया फॉरेस्ट सर्विस में तीसरी रैंक हासिल की और तीसरे प्रयास में 69वीं रैंक प्राप्त कर अपना लक्ष्य पूरा किया।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि परिस्थितियों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा बनाएं। एक साइकिल ने बचाई बच्चे की पढ़ाई कलेक्टर ने अपने प्रशासनिक जीवन के दो प्रसंग सुनाए। उन्होंने बताया कि छतरपुर में तहसीलदार रहते हुए एक विद्यार्थी आर्थिक तंगी के बावजूद मार्गदर्शन लेने पहुंचा था। आज वह दिल्ली विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद डीएसपी बन चुका है। वहीं एक अन्य बच्चे के पिता आर्थिक परेशानी के कारण उसकी पढ़ाई छुड़वाना चाहते थे। बच्चे को साइकिल दिलवाकर उन्होंने उसकी पढ़ाई जारी रखने में मदद की। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद की शिक्षा जारी रखने में सहयोग करना प्रशासनिक सेवा की बड़ी संतुष्टि है।

एसपी अमित तोलानी ने कहा कि सिविल सेवा की तैयारी से पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि इस सेवा में क्यों आना चाहते हैं। निरंतरता, अनुशासन और अच्छी संगति सफलता की कुंजी हैं। पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें, नियमित अभ्यास करें और मित्रों के साथ पढ़ाई से जुड़े विषयों पर चर्चा करें। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने यूपीएससी, एमपीपीएससी, आंसर राइटिंग, वैकल्पिक विषय, हिंदी-अंग्रेजी माध्यम, टाइम मैनेजमेंट और आरक्षण से जुड़े सवाल पूछे। अधिकारियों ने उनके सवालों के जवाब दिए। महाविद्यालय में गठित सिविल सर्विसेज सोसायटी के माध्यम से अब विद्यार्थियों को नियमित मार्गदर्शन, विशेषज्ञों के व्याख्यान, काउंसलिंग और अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। प्राचार्य डॉ. वीबी खरे के प्रयासों से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य राजगढ़ के युवाओं को अपने जिले में ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।