मंडी, 02 नवंबर । पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार को शुल्क की सरकार करार दिया है। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा होटलों के संचालन सहमति शुल्क के ढांचे में भारी बढ़ोतरी का विरोध करते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार का गवर्नेंस मॉडल ही जनता और कारोबारियों पर बेहिसाब शुल्क लगाना बन चुका है।
उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि टॉयलेट टैक्स जैसे बेतुके फैसले में हुई किरकिरी के बाद कभी पर्यटकों की गाड़ियों पर टैक्स लगाया जाता है, तो कभी स्कूल-कॉलेज की फीस में बेतहाशा बढ़ोतरी की जाती है। कभी इलाज के खर्च जैसी आवश्यक सेवाओं पर शुल्क बढ़ाया जा रहा है तो कभी राजस्व जैसे छोटे छोटे काम के लिए तहसील में जाने वाले लोगों से भारी फीस बसूलकर सरकारी राजस्व बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि अब हिमाचल प्रदेश में होटल कारोबार करने वाले कारोबारी इनके निशाने पर आ गए हैं। जिनसे 150 गुणा अधिक फ़ीस वसूली जा रही है जिससे अब इनका कारोबार करना और अधिक महंगा हो गया है। प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने होटलों के संचालन सहमति शुल्क के ढांचे में भारी बदलाव किया है, जिसके तहत छोटे होटलों के शुल्क में 150 फीसदी तक की बेतहाशा बढ़ोतरी कर दी गई है। इस नए फैसले के मुताबिक, 10 से 13 कमरों वाले ग्रीन श्रेणी के छोटे होटल संचालकों को अब पांच साल के लिए 72 हजार रुपए के बजाय सीधे 1.80 लाख रुपए का भुगतान करना होगा, जिससे उन पर 1.08 लाख रुपए का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।
इसके साथ ही, उनका वार्षिक शुल्क भी 14,400 रुपए से बढ़ाकर 36,000 रुपए कर दिया गया है। वहीं दूसरी ओर, 20 से अधिक कमरों वाले ‘ऑरेंज श्रेणी’ के होटलों पर भी इसका बड़ा असर पड़ेगा, जिनका पांच साल का संभावित शुल्क बढ़कर 3 से 5 लाख रूपए तक पहुँच सकता है। इस संशोधित शुल्क ढांचे को कंसेंट टू एस्टेब्लिश (सीटीई) और कंसेंट टू ऑपरेट (सीटीओ) दोनों के लिए लागू किया गया है, जिसके कारण पुराने होटल संचालकों को बोर्ड की ओर से शुल्क जमा न करने पर होटल बंद करने के नोटिस भी जारी किए जा रहे हैं।
