नई दिल्ली, 06 नवंबर । उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार काे महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि दिवाली और अन्य त्योहारों के दौरान ‘साफ हवा’ की पहल को “जन आंदोलन” में बदलना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसे त्योहारों पर प्रदूषण को केवल अदालती आदेशों या पुलिस की तैनाती के जरिए नियंत्रित नहीं किया जा सकता। उच्चतम न्यायालय ने यह टिप्पणी दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर दर्ज एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई के दौरान की।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार और अन्य संबंधित अधिकारियों से कहा है कि वे स्थानीय नगर पार्षदों को सक्रिय रूप से शामिल करें, ताकि वे नागरिकों से आने वाली दिवाली पर प्रदूषण फैलाने वाले पटाखे न फोड़ने की अपील कर सकें। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि देश के हर नागरिक को इसमें अपना योगदान देना होगा। जब तक लोग स्वयं जागरूक होकर प्रदूषण फैलाने वाले तौर-तरीकों का त्याग नहीं करेंगे, तब तक जमीनी स्तर पर कोई बड़ा बदलाव देखना नामुमकिन है।
उच्चतम न्यायालय ने याद दिलाया कि सर्दियों के मौसम में दिल्ली-एनसीआर की हवा बेहद जहरीली हो जाती है, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को सांस लेने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में त्योहारों की खुशी को दूसरों के स्वास्थ्य की कीमत पर नहीं मनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने उम्मीद जताई है कि जन-प्रतिनिधियों और नागरिकों के सामूहिक प्रयास से आने वाले समय में प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित त्योहारों की नई शुरुआत होगी।
इससे पहले 2 नवंबर को उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर लगा बैन दिवाली पर दो दिनों के लिए सशर्त हटाने आदेश दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा था कि सर्टिफाइड ग्रीन पटाखे 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 बजे और रात 8 से 10 बजे के दौरान जलाए जा सकेंगे। इस साल दिवाली 8 नवंबर को है।
