नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने चीनी स्मार्टफोन कंपनी वीवो से जुड़े मनी लांड्रिंग मामले में वीवो के मैनेजिंग डायरेक्टर हरिओम राय की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए फैसला सुरक्षित रख लिया है। एडिशनल सेशंस जज किरण गुप्ता ने 12 जनवरी को फैसला सुनाने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से पेश वकील मनीष जैन ने हरिओम राय की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि केस के गुण-दोषों और याचिकाकर्ता की बीमारी को अलग-अलग देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जांच के दौरान वीवो के खिलाफ फर्जीवाड़े की शिकायतें पता चली। कंपनी के शेयर होल्डर झांग जी ने डायरेक्टर आईडेंटिफिकेशन के लिए फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल किया। फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस के जरिये उसने बैंक खाता भी खुलवाया।
सुनवाई के दौरान हरिओम राय की ओर से पेश वकील नीतेश राणा ने कहा कि हरिओम राय के खिलाफ लगे आरोप झूठे और बेतुके हैं। आरोपित का वीवो कंपनी के व्यवसाय से परोक्ष या अपरोक्ष कोई नाता नहीं है। आरोपित को वीवो कंपनी या उससे जुड़ी किसी दूसरी कंपनी से कोई वित्तीय लाभ नहीं हुआ है।
पटियाला हाउस कोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए 18 नवंबर, 2023 को ईडी को नोटिस जारी किया था। इस मामले में हरिओम राय समेत चार आरोपित फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। याचिका में कहा गया है कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और आरोपित की अब हिरासत की कोई जरूरत नहीं है।
ईडी ने राय समेत चार आरोपितों को 10 अक्टूबर, 2023 को गिरफ्तार किया था। ईडी ने इस मामले में 2022 में देशभर में फैले वीवो कंपनी के 48 जगहों पर छापा मारा था। ईडी ने वीवो कंपनी से जुड़ी 23 कंपनियों पर भी छापा मारा था। 30 दिसंबर को पटियाला हाउस कोर्ट ने वीवो इंडिया के अंतरिम सीईओ हांग शुकुआन ऊर्फ टेरी के अलावा सीएफओ हरिंदर दहिया और कंसल्टेंट हेमंत मुंजाल की गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए उन्हें रिहा करने का आदेश दिया था। इसी आदेश को ईडी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है।