जालंधर निगम में कर्मचारियों ने दिया अल्टीमेटम: 13वां वेतन नहीं तो हड़ताल!

आज पंजाब के जालंधर नगर निगम मुख्यालय पर नगर निगम के कर्मचारियों ने अधिकारियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने नगर निगम और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। नारेबाजी के बाद कर्मचारी नगर निगम परिसर में अपने साथियों के साथ धरने पर बैठ गए। उनका मुख्य मुद्दा 13वें वेतन और अन्य मांगों को लेकर है। प्रदर्शन करते हुए, कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे हड़ताल करने को मजबूर होंगे, जिससे नगर निगम के कार्यों में गंभीर बाधा उत्पन्न होगी और शहर में कूड़ा उठाने का काम प्रभावित होगा।

कर्मचारियों ने अपने गुस्से को उजागर करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने कई बार वेतन वृद्धि और अन्य मुद्दों पर वायदा किया लेकिन उन वायदों को पूरा नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी मांगों की बात की जाए तो वे कम हैं, लेकिन सबसे प्राथमिक मांग 13वें वेतन का जल्दी निर्णय लेना है। उन्होंने ये स्पष्ट किया कि जब तक उन्हें लिखित में कुछ नहीं मिलता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। कर्मचारी इस बात पर जोर दे रहे हैं कि सरकार ने कई बार बातचीत की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं निकला।

कर्मचारी नेताओं का कहना था कि अगर आज उनकी मांगे पूरी नहीं की गई, तो कल वे व्यापक बंद का आह्वान करेंगे। दीपावली जैसे बड़े त्योहार से पहले इस समस्या का समाधान होना जरूरी है, क्योंकि अधिकारी उन्हें धरने पर बैठने के लिए मजबूर कर रहे हैं। कर्मचारियों ने यह भी बताया कि उन्हें छुट्टियों के दौरान कोई भुगतान नहीं किया जाता, जबकि अमृतसर में पिछले दो सालों से ऐसा भुगतान सुनिश्चित किया गया है। इसे लेकर उन्होंने जालंधर नगर निगम से मांग की कि वहां भी अमृतसर की तर्ज पर कर्मचारियों को छुट्टियों के लिए धन उपलब्ध कराया जाए।

इस प्रदर्शन में जुटे कर्मचारी अपने हक के लिए एकजुट हुए हैं और उन्होंने अपने अधिकारों की आवाज उठाने का संकल्प लिया है। अगर सरकार उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेती, तो निश्चित तौर पर जालंधर नगर निगम के कामकाज में गंभीर संकट आ जाएगा। इस स्थिति को लेकर स्थानीय नागरिकों में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि अगर हड़ताल होती है, तो शहर की सफाई व्यवस्था और अन्य सेवाएं प्रभावित होंगी। कर्मचारियों ने एकजुट होकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है और अब सबकी नजरें सरकार की तरफ हैं कि वह इस मुद्दे का जल्द समाधान निकालती है या नहीं।